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भगत सिंह द्वारा जेल में लिखा गया लेख और 300 पेज का वो फैसला, छिपी कहानी से हटा पर्दा

Sat, 28 Sep 2019 11:28 AM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Garima Garg Updated Sat, 28 Sep 2019 11:28 AM IST
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bhagat singh jayanti: know about these secrets
शहीद भगत सिंह

आज महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह का जन्मदिवस है। देश का बच्चा-बच्चा इनकी आजादी की कहानी सुनकर बड़ा हुआ है। पर क्या आप उनके द्वारा जेल में लिखे गए लेख और 300 पेज के उस फैसले के बारे मेें जानते हैं जब उन्हें फांसी सुनाई... पढ़ते हैं आगे 



bhagat singh jayanti: know about these secrets
पहले जेल में ही भगत सिंह ने धर्म और ईश्वर के अस्तित्व को लेकर लंबा लेख लिखा। लेख लिखने की वजह भगत सिंह के साथ सेंट्रल जेल में ही बंद बाबा रणधीर सिंह थे, जो 1930 से लेकर 1931 तक भगत सिंह के साथ रहे। वे धार्मिक थे, धर्म और ईश्वर को लेकर भगत सिंह से लंबी चर्चा करते रहे। उन्होंने भगत सिंह को ईश्वर में विश्वास दिलाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वे उन्हें समझा नहीं सके। ईश्वर, नास्तिकता और धर्म को लेकर भगत सिंह का यह लेख 27 सितंबर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में 'मैं नास्तिक क्यों हूं?' शीर्षक से प्रकाशित हुआ। 
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 16 साल की उम्र में ही उनकी शादी तय करने की कोशिश हुई थी। इतना ही नहीं इस बात से नाराज होकर भगत सिंह घर से भागकर कानपुर चले गए थे। घर से जाते समय उन्होंने अपने पिता से पत्र में माफी भी मांगी और लिखा, “उम्मीद है कि आप मुझे माफ फरमाएंगे।”
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सरदार भगत सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
महान क्रांतिकारी भगत सिंह को अंग्रेजों ने 23 मार्च 1931 की सुबह 7:30 बजे लाहौर में फांसी दे दी थी। 300 पेज के फैसले में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी। वह देश की आजादी के लिए ब्रिटिश सरकार से लड़ रहे थे, लेकिन भारत की आजादी के 70 साल बाद भी सरकार उन्हें दस्तावेजों में शहीद नहीं मानती। अलबत्ता जनता उन्हें शहीद-ए-आजम मानती है।

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भगत सिंह
अप्रैल 2013 में केंद्रीय गृह मंत्रालय में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लेकर एक आरटीआई डाली गई, जिसमें पूछा कि भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को शहीद का दर्जा कब दिया गया। यदि नहीं तो उस पर क्या काम चल रहा है? इस पर नौ मई को गृह मंत्रालय का हैरान करने वाला जवाब आया। इसमें कहा गया कि इस संबंध में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। तब से शहीद-ए-आजम के वंशज (प्रपौत्र) यादवेंद्र सिंह संधू सरकार के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं।

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