गोलियों की गूंज, बम धमाके, हर तरफ फैली हिंसा, लग ही नहीं रहा था कि जान बचेगी। बचते-बचाते किसी तरह काबुल के एयरपोर्ट पर पहुंचा। बाहर गोलियां चल रही थीं। अंदर किसी तरह फ्लाइट मिल गई। अफगानिस्तान की सीमा में रहने तक भी यकीन वापस नहीं लौटा था। शनिवार शाम दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने पर राहत की सांस ली। अपने माता-पिता, एक भाई के साथ दिल्ली पहुंचे अफगानी नागरिक शदीद ने वहां के हालात की जानकारी एक सांस में दे डाली। बात करते वक्त उसकी आंखों में दशहत साफ दिख रही थी।
अफगानिस्तान से निकले नागरिकों की दास्तां: वहां कैसे रहें...बेटियों को उठा ले जाते हैं तालिबानी
भारत पहुंचने वालों में नकदी और धन के साथ सरकारी नौकरी करने वाले भी कई कर्मी अपने परिवार के साथ अपना देश छोड़ गए। तालिबानी फरमान को इंसानियत के खिलाफ बताते हुए वहां के नागरिक शरणार्थी के तौर पर किसी भी देश में जीवन जीने के लिए तैयार हैं। लाजपत नगर में मौजूद अफगानी नागरिकों ने बातचीत में भारत सरकार से गुजारिश की है कि जो लोग अफगानिस्तान में फंसे हैं उन्हें परिजनों से मिलवाने में कोई कदम बढ़ाए ताकि उन्हें जिंदगी जीने का मौका मिल सके। भारत की ओर से इसके लिए की जा रही कोशिशों की तारीफ करते हुए पाकिस्तान और अमेरिका को इस हालात के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
कहां करें पलायन, देश से बाहर निकलना भी हुआ मुश्किल
तालिबान के कब्जे के बाद वहां के सभी दफ्तर, बैंक बंद हैं, इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हैं। विमानों की आवाजाही बंद होने से दूसरे देशों से भी भारत आने के लिए नागरिक लगातार कोशिश कर रहे हैं। वीजा को ऑनलाइन बनाने सहित प्रक्रिया में फिलहाल राहत देने की मांग की है। भारत के लिए विमान सेवा बंद होने की वजह से अफगानिस्तान से पलायन करने वालों का यही सवाल है कि आखिरकार अब जाएं तो कहां।
जिंदगी बचाने के लिए दो भाई अमेरिकी फ्लाइट में हो गए सवार
वाजिद ने बताया कि दो दिन पहले उनके दो चचेरे भाई काबुल एयरपोर्ट पर थे। कुछ दिन पहले तक अमेरिकी सेना के साथ काम करते थे, लेकिन हालात खराब होने लगे तो देश से बाहर जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे। वहां पहुंचने पर अमेरिकी सैनिकों से बातचीत के बाद उन्होंने खुद को असुरक्षित बताते हुए साथ ले जाने की गुहार लगाई। दोनों भाइयों को अमेरिकी फ्लाइट में ले जाया गया। हालांकि वाजिद की पत्नी, बच्चे और पिता अभी भी काबुल में फंसे हैं।
अफगानी मुद्रा की कीमतें घटी, बढ़ी मुश्किलें
फ्लाइट टिकटों की बुकिंग करने वाली अफगानी महिला ने बताया कि पिछले तीन-चार दिन में अफगानिस्तान की मुद्रा का तेजी से अवमूल्यन हुआ है। इससे लोगों को कहीं आने जाने या वीजा हासिल करने में पहले से काफी अधिक खर्च हो रहा है। पहले एक डॉलर करीब 70 अफगानी रुपये में मिल रहा था। अब यह बढ़कर 80 रुपये से अधिक हो गया है। इससे महंगाई कई गुना बढ़ गई है, जिससे अफगानी नागरिकों के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं।