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दंगों का दर्द: साहब! मेरे बच्चों ने किसी का क्या बिगाड़ा था, बहकावे में आकर मेरे बेटों को मार डाला, फफककर रो पड़े पिता
Fri, 19 Feb 2021 09:31 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 19 Feb 2021 09:31 AM IST
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दिल्ली हिंसा का एक साल पूरा
- फोटो : अमर उजाला
यूं तो वक्त बड़े से बड़ा जख्म भर देता है, लेकिन दिल्ली दंगों का दर्द भुलाया नहीं जा सकता। उनके लिए तो खासतौर से, जिन्होंने आंखों के सामने अपनों का कत्ल होते देखा। जिन 53 लोगों की हत्या हुई वे किसी एक समुदाय से नहीं थे। दंगे के साल भर बाद भी वे यही सवाल कर रहे हैं कि उनका कसूर क्या था, उन्होंने किसका क्या बिगाड़ा था? दंगों का दर्द उजागर करती शुजात आलम और राजीव कुमार की रिपोर्ट....
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बहकावे में आकर मेरे बेटों को मार डाला...
साहब, मेरे बच्चों ने किसी का क्या बिगड़ा था, दंगाईयों को मेरे बच्चों को मारकर क्या मिला, इससे उनको क्या मिलने वाला है, क्या कोई मुझे बता सकता है...बात करते-करते बाबू खान की आंखों से टप-टप आंसू करने लगे, आज इंसान जानवर से भी बदतर हो गया है, कुछ लोगों के बहकावे में आकर दंगाईयों ने हमारे परिवार को खत्म ही कर दिया।% बाबू खान अपनी बात खत्म वक्त फफककर रो रहे थे, जिनको बेहद मुश्किल से संभाला जा सका।
साहब, मेरे बच्चों ने किसी का क्या बिगड़ा था, दंगाईयों को मेरे बच्चों को मारकर क्या मिला, इससे उनको क्या मिलने वाला है, क्या कोई मुझे बता सकता है...बात करते-करते बाबू खान की आंखों से टप-टप आंसू करने लगे, आज इंसान जानवर से भी बदतर हो गया है, कुछ लोगों के बहकावे में आकर दंगाईयों ने हमारे परिवार को खत्म ही कर दिया।% बाबू खान अपनी बात खत्म वक्त फफककर रो रहे थे, जिनको बेहद मुश्किल से संभाला जा सका।
आमिर और हाशिम के पिता बाबू खान
- फोटो : अमर उजाला
हिंसा के दौरान 26 फरवरी 2020 को दंगाईयों ने पुराने मुस्तफाबाद के रहने वाले दो सगे भाईयों आमिर खान (30) और हाशिम अली(19) की हत्या कर दी थी। बाद में दोनों के शव व उनकी बाइक को जलाकर नाले में फेंक दिया था। अगले दिन पुलिस को दोनों भाईयों के शव नाले से बरामद हुए थे। बीमार रहने वाले बाबू खान ने बताया कि अब वह सिर्फ अपने बच्चों के लिए जी रहा है,। एक पिता के लिए इससे बड़ा गम क्या होगा कि उसने अपने एक नहीं दो-दो जवान बच्चों के जनाजों को कंधा दिया।
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हाशिम (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
आमिर और हाशिम अपने परिवार के साथ गली नंबर-16/17, पुराना मुस्तफाबाद में रहते थे। इनके परिवार में पिता बाबू खान, मां असगरी बेगम, तीन भाई व तीन बहन हैं। आमिर शादशुदा था, उसके परिवार में पत्नी सबीना के अलावा दो बेटी अल्फीशा और अलीशा थीं। पति की मौत के समय सबीना तीन माह की गर्भवती थी। बाबू खान ने बताया कि आमिर व हाशिम की मां पिछले कुछ दिनों से गाजियाबाद अपने मायके गई हुई थीं। आमिर के नाना की तबीयत खराब थी।
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आमिर (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
आमिर व हाशिम अपने नाना को देखने गाजियाबाद चले गए, लेकिन उस बीच जिले में हिंसा हो गई। परिजनों के कहने पर दोनों गाजियाबाद ही रुके रहे। इस बीच 26 फरवरी की रात को दोनों अपनी बाइक से भागीरथी विहार होते हुए घर लौट रहे थे। इस बीच दंगाईयों ने भागरथी विहार नाले की पुलिया पर उनको रोक लिया। इसके बाद दोनों की बेरहमी से हत्या कर शव को जलाकर नाले में फेंक दिया गया। हत्या से पांच मिनट पहले ही हाशिम की परिवार से बात हुई थी, उसने कहा था कि वह घर के पास ही हैं और पांच मिनट में पहुंच जाएंगे।