"आ जा मेरे गाड़ी में बैठ जा, हममें क्या कांटे लगे हैं..." कुछ ऐसे ही वाक्य बोलकर मंगलवार को सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के नीचे खड़े ऑटो चालक महिला यात्रियों को अपने ऑटो में बैठाने की जिद्द कर रहे थे। इतना ही नहीं, मेट्रो स्टेशन से उतरने वाली महिला यात्रियों को पहले तो ऑटो चालक घेर लेते और फिर ऑटो में बैठाने के बहाने छूने की कोशिश कर रहे थे।
मेट्रो से निकलते ही महिलाओं पर झपट जाते हैं ऑटो चालक, देखें तस्वीरें, कैसे करते हैं अश्लील हरकत
इस वजह से एक लड़की की ऑटो चालक से कहासुनी तक हो गई। इस दौरान दूर-दूर तक एक भी पुलिस कर्मी दिखाई नहीं दे रहा था। मेट्रो स्टेशन सीढ़ियों पर यात्रियों से ज्यादा ऑटो चालकों का जमावड़ा था। ये नजारा किसी एक मेट्रो स्टेशन या फिर एक दिन का नहीं है, बल्कि रोजाना शहर के लगभग हर मेट्रो स्टेशन के नीचे ऐसी स्थिति से महिला यात्रियों को दो चार होना पड़ता है। इससे उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जब महिला यात्रियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ऑटो वालों की शिकायत करते भी हैं तो एक घंटे में पुलिस आती है। इसके बाद पुलिस कर्मी कार्रवाई करने के बजाए मामले को निपटाने में जुट जाते हैं। यदि ज्यादा विरोध करो तो चालक को पकड़ तो लेते हैं, लेकिन कुछ ही दूर ले जाकर पैसे लेकर मामला रफा-दफा कर देते हैं। ऐसे में हमारा ही समय बर्बाद हो जाता है। जबकि आरोपियों का कुछ नहीं बिगड़ता। मेट्रो स्टेशन के पास ऑटो चालकों की मनमानी से रू-ब-रू कराती अमर उजाला संवाददाता नेहा शर्मा और फोटोग्राफर लाल सिंह की रिपोर्ट...
बैठाने के बहाने करते हैं अश्लील हरकत
शहर के लगभग सभी मेट्रो स्टेशनों के नीचे ऑटो चालकों का जमावड़ा लगा रहता है। सिटी सेंटर, बॉटेनिकल गार्डन, सेक्टर- 52, सेक्टर-15 आदि मेट्रो स्टेशनों पर ऑटो चालकों की लाइन लगी रहती है। मेट्रो स्टेशन से उतरी रही सारिका वर्मा ने बताया कि यहां पर ऑटो चालक दो अर्थ वाली बातें कर अश्लील इशारा करते हैं। एक झुंड की तरह चारों ओर से महिलाओं और लड़कियों को घेर लेते हैं और फिर मौका पाते ही अश्लील हरकत तक कर जाते हैं। विरोध करने पर अभद्र व्यवहार के साथ मारपीट तक उतारू हो जाते हैं। इनके मुंह भी नहीं लग सकते हैं। रोज इसी रूट से आना होता है। किसी पर भरोसा नहीं कर सकते हैं।
ऑटो में बैठकर नशा कर रहे थे बच्चे
सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के नीचे एक ऑटो में बैठकर छोटे बच्चे नशा कर रहे थे। इनको रोकने वाला कोई नहीं था। इनसे बात की गई तो बताया कि हम तो रोज यहीं बैठकर नशे की दवा सूंघते हैं। मेट्रो स्टेशन के नीचे ही हमें नशा करने वाली डिब्बी मिल जाती है। उन्होंने बताया कि पेन आदि बेचकर जो कमाई करते हैं, उससे नशे की डिब्बी आसानी से मिल जाती है।