शाहबेरी में हादसे से पहले छत पर खड़े होकर नौशाद फोन पर बात कर रहे थे। इसी दौरान अचानक निर्माणाधीन इमारत आ गिरी। नौशाद भी दबकर जान गंवा बैठे। बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मौजूद नौशाद की पत्नी सबीना ने बताया कि प्रशासन ने इतनी खराब सामग्री की इमारत क्यों बनने दी।
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- फोटो : अमर उजाला
बच्चों की परवरिश के लिए पैसा कमाने के लिए नोएडा आए थे, लेकिन हम से जिंदगी ही छीन ली गई। मुझे हमदर्दी नहीं, पति चाहिए। सबीना ये बातें सुनकर पोस्टमार्टम हाउस के स्टाफ तक की पलकें भीग गईं। सबीना ने कहा कि प्रशासन की तरफ से 50 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। मेरे दो बच्चे हैं। जिनका स्कूल में दाखिला होना है।
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क्या ये पैसे मेरे और दोनों बच्चों के लिए पर्याप्त होंगे। इतने पैसे तो दफनाने और अन्य कामों में लग जाएंगे। मेरी जिंदगी कैसे चलेगी। दो महीने पहले सास का भी देहांत हो गया था। मां-बाप भी नहीं हैं। मुझे आधे हिस्से में लकवा है। 2 महीने से उसका इलाज चल रहा है। नौशाद हर महीने इलाज के लिए पैसे भेजते थे, जिससे मेरा इलाज होता था। अब मैं किसे अपना दर्द सुना पाऊंगी।
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बच्ची लगा रही आवाज, पापा आ जाओ
नौशाद की साढ़े तीन साल की बच्ची पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठी हुई थी। वह बार-बार मां सबीना से पापा के बारे में पूछ रही थी। कई बार उनको याद करके रो भी रही थी। बार-बार बोल रही थी ‘पापा आ जाओ।’