डेंगू का डंक: खोखले हैं सरकारी दावे, इस तरह हो रहा इसका इलाज
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री भले ही हर दिन मीडिया के सामने यह कह रहे हैं कि अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ा दी गई है और सभी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं लेकिन अस्पतालों का हाल देखने के बाद यह दावे खोखले नजर आते हैं। (सभी फोटो: कुमार संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली)
डेंगू का डंक: खोखले हैं सरकारी दावे, इस तरह हो रहा इसका इलाज
एमसीडी का अस्पताल हो या दिल्ली सरकार का। हर जगह एक ही स्थिति है। मरीज और तीमारदार परेशान हैं। डेंगू मरीजों की बढ़ती संख्या के आगे अस्पताल की व्यवस्था बौनी साबित हो रही है।
डेंगू का डंक: खोखले हैं सरकारी दावे, इस तरह हो रहा इसका इलाज
दिल्ली नगर निगम के सबसे बड़े हिंदू राव अस्पताल का जायजा लेने पर पता लगा कि मरीजों की संख्या के सामने डॉक्टर, नर्सेज और पैरामेडिकल स्टाफ बेहद कम हैं। स्थिति यह है कि मरीज के तीमारदार खुद ही ग्लूकोज का बोतल लगाना और निकालना सीख रहे हैं। जिस मरीज के तीमारदार को ग्लूकोज लगाना और निकालना नहीं आ रहा है उन्हें काफी दिक्कत पेश आ रही है।
डेंगू का डंक: खोखले हैं सरकारी दावे, इस तरह हो रहा इसका इलाज
मरीज को यदि शौचालय जाना है तो तीमारदार ग्लूकोज हाथ में लेकर मरीज के साथ शौचालय तक जा रहा है। नर्सों के पास भी इतना समय नहीं है कि मरीज का ग्लूकोज निकाले और हटाए, क्योंकि हर समय नए मरीज वार्ड में पहुंच रहे हैं।
डेंगू का डंक: खोखले हैं सरकारी दावे, इस तरह हो रहा इसका इलाज
बुराड़ी के नत्थुपूरा से रामेश्वर बेटे विशाल (14) का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे। रामेश्वर ने बताया कि तीन-चार दिन पहले भी बुखार के बाद इलाज के लिए आए थे लेकिन डॉक्टरों ने दवा देकर घर भेज दी थी। बुधवार को तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी तब दोबारा अस्पताल आए हैं। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई तब चिकित्सकों ने भर्ती किया है।