भारत में रहने वाले 29 साल के युवा अंकित से पिछले दिनों ब्रिटेन में रह रही एक महिला ने संपर्क किया। ये महिला पिछले तीन साल से एक ही संस्थान में काम कर रही थी और वेतन वृद्धि न होने से निराश हो चुकी थी। उन्होंने तय किया कि संस्थान छोड़ देगी पर समझ नहीं पा रही थीं कि इस बात को वे कैसे अलग अंदाज में कहें। तब उन्होंने गूगल पर सर्च किया और पाया कि कोई ऐसा भी है जो उनके लिए हाथ से इस्तीफा लिखकर भेज सकता है।
इस सिलसिले में ब्रिटिश महिला ने भारत में अपना स्टार्टअप चला रहे अनुभव अंकित को फोन लगाया और अपने दिल की बात बताई। बस फिर क्या था, अंकित की 'द इंडियन हैंडरिटेन लेटर कंपनी' ने उनकी भावनाओं को स्याही से लिखकर कागज पर उतार दिया। महिला ने हाथ से लिखा ये इस्तीफा अपने बॉस को भेज दिया।
हाथ से लिखे इस भावनात्मक इस्तीफे का इतना असर हुआ कि महिला के बॉस ने तीन दिन बाद ही उनके डेस्क पर उस खत का जवाब रख दिया। जवाबी खत में महिला से अनुरोध किया गया कि वो कंपनी छोड़कर न जाएं और साथ ही साथ उन्हें 40 प्रतिशत का बड़ा इंक्रीमेंट भी दे दिया गया। ऐसी ही कई अनोखी कहानियां दो युवाओं के द्वारा शुरु किए गए स्टार्टअप 'द इंडियन हैंडरिटेन लेटर कंपनी' के प्रति लोगों के रुझान को दर्शाती हैं। इस स्टार्टअप का मकसद इंटरनेट के इस जमाने में खत लिखने की पुरानी आदत को जिंदा रखना और इसे बढ़ावा देना है।
'द इंडियन हैंडरिटेन लेटर कंपनी' के संस्थापक सदस्यों में से एक अनुभव अंकित बताते हैं कि जब वो स्कूल में पढ़ते थे हर हफ्ते अपने दादाजी को खत लिखा करते थे, लेकिन स्कूल से निकलने के बाद वो सिलसिला खत्म हो गया।
अंकित का खत लिखना तो बंद हो गया लेकिन, मार्केटिंग के प्रोफेशन में आने के बाद भी लिखने को लेकर उनकी दीवानगी खत्म नहीं हुई। अंकित ने इस बारे में जब अपने साथी जसवंत चेरीपल्ली से बात की तो उन्हें भी ये आईडिया काफी रास आया। यहीं से इनके स्टार्टअप 'द इंडियन हैंडरिटेन लेटर कंपनी' की शुरुआत हुई।