2017 में आईपीएल के दौरान ऋषभ पंत ने अपने पिता को खोया था। 4 अप्रैल 2017 को ऋषभ के पिता का आकस्मिक निधन हो गया था। अंतिम संस्कार के लिए उन्हें टीम का साथ छोड़कर रुड़की (उत्तराखंड) जाना पड़ा।
उस वक्त ऋषभ महज 20 साल के थे। ऐसी विपरित परिस्थितियों में भी हार न मानते हुए ऋषभ ने न सिर्फ पिता का अंतिम संस्कार किया, बल्कि रुड़की से लौटते ही अपनी टीम दिल्ली डेयरडेविल्स के लिये बेहतरीन पारी खेली थी।
तब 158 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली की टीम के 55 रनों पर 3 विकेट गिर चुके थे। पिता का दुख, मानसिक दबाव और विपरित हालातों के बावजूद उन्होंने खेल के प्रति अपना समर्पण दिखाते हुए 36 गेंदों की अपनी पारी में 57 रन बनाए थे। उस दिन ऋषभ ने तूफानी पारी खेली थी।
भारतीय क्रिकेट में माता/पिता की मौत के तुरंत बाद मैदान पर आकर शानदार खेल दिखाने वालों में पहला नाम सचिन तेंदुलकर का आता है। 1999 विश्व कप के दौरान उनके पिता की मौत हो गई थी, पिता का अंतिम संस्कार कर सचिन दोबारा इंग्लैंड लौटे और केन्या के खिलाफ 140 रन की शानदार पारी खेल डाली।
इस कड़ी में टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली का भी नाम आता है। उनके पिता का 19 दिसंबर 2006 को ब्रेन स्ट्रोक के कारण देहांत हो गया था। तब महज 18 साल के विराट कनार्टक के खिलाफ रणजी मैच खेल रहे थे। सबने सोचा कि वह मैच में नहीं खेलेंगे, लेकिन विराट मैदान पर उतरे और 90 रन की यादगार पारी खेलकर पिता की चिता को अग्नि दी थी।