जिस विश्वप्रसिद्ध बाबा के आशीर्वाद ने पीएम मोदी, फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स को सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंचाया आज उनका धाम बिना उत्तराधिकारी के है।
गुरुवार को सिद्धि मां के शरीर त्यागने के बाद अब कैंची धाम और अन्य कार्यों की देखरेख कौन करेगा अथवा सिद्धि मां का उत्तराधिकारी कौन होगा? इसे लेकर भी नगर और आसपास के क्षेत्रों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल उत्तराधिकारी को लेकर अभी किसी का नाम सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि निकट भविष्य में उत्तराधिकारी को लेकर कुछ नाम सामने आ सकते हैं।
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pm modi and mark zuckerberg's baba neem karoli maharaj
कैंची धाम में बीते 42 साल से मंदिर की व्यवस्थाओं को देख रहीं सिद्धि माई नैनीताल के उच्च परिवार से ताल्लुक रखती थीं। जब पहली बार वे बाबा नीब करोरी महाराज से मिलीं तो उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़कर उनकी भक्त बनने का फैसला किया। बाबा ने भी उनके समर्पण को देखते हुए अपना शरीर त्यागने से पहले कैंची धाम की पूरी जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी थी। सिद्धि माई भी अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक कैंची धाम की सेवा में जुटी रहीं।
नीब करोरी महाराज के शरीर त्यागने के बाद से ही सिद्धि माई ट्रस्ट से जुड़ी सभी संस्थाओं की प्रमुख कर्ताधर्ता थीं। ट्रस्ट से जुड़े लोग बताते हैं कि बाबा नीब करोरी वर्ष 1962 में यहां आए थे। उन्होंने शिप्रा नदी के किनारे अपनी धूनी रमाई। धीरे-धीरे यहां आसपास के लोगों का आना शुरू हो गया। 15 जून 1965 को बाबा नीब करोरी ने कैंची में हनुमान मंदिर की स्थापना की।
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इसी बीच नैनीताल में रहने वाली और उच्च परिवार से ताल्लुक रखने वाली सिद्धि साह (सिद्धि माई) भी कैंची धाम पहुंचीं। उन्होंने महाराज के सानिध्य में रहकर कैंची मंदिर की सेवा का संकल्प लिया। वह नीब करोरी महाराज की अनुपस्थिति में मंदिर के सभी कार्यों को खुद देखती थीं।