करीब चार साल पहले भी टनकपुर से बगैर इंजन मालगाड़ी के आठ डिब्बे अचानक दौड़ पड़े थे। तब भी बड़ा हादसा होने से बचा था। बगैर इंजन दौड़े मालगाड़ी के इन डिब्बों को खटीमा में छह लाइनें लदी डिपट्राली को ट्रेक में अवरोधक बनाकर रोका गया था।
इस घटना में भी बनबसा के पास मालगाड़ी के डिब्बों की चपेट में आकर छह बकरियों की मौत हुई थी और चकरपुर में ट्रेक पर खड़े एक ट्रैक्टर को भी डिब्बे घसीटकर खटीमा तक ले गए थे।
उल्टी दौड़ती ट्रेन: 24 किलोमीटर उल्टी दौड़ी पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस, यात्रियों में मचा हड़कंप, तस्वीरें...
यह वाकया वर्ष 2017 का है, जब पीलीभीत से टनकपुर तक बड़ी रेल लाइन बिछाने का काम चल रहा था। गिट्टी ले जाने के लिए टनकपुर स्टेशन में मालगाड़ी के आठ डिब्बे बगैर इंजन खड़े थे। जेसीबी मशीन से इन डिब्बों में गिट्टी लादी जा रही थी कि जेसीबी से लगे धक्के से मालगाड़ी के ये डिब्बे अचानक ट्रेक पर दौड़ पड़े।
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इससे रेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे। टनकपुर से बनबसा तक इन डिब्बों को रोकने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली थी।
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उल्टी दौड़ने लगी ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद बनबसा स्टेशन से आगे बढ़ चुके डिब्बों को रोकने के लिए चकरपुर के पास लाइन पर एक ट्रैक्टर खड़ा किया गया, लेकिन तेज रफ्तार ये डिब्बे ट्रैक्टर को भी अपने साथ घसीट ले गए। तब तक खटीमा स्टेशन पर अवरोधक बना दिया गया था और इन डिपट्रॉलियों से टकराने के बाद ही डिब्बों को रोकने में सफलता मिल पाई थी।
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बता दें कि बुधवार को दिल्ली से यात्रियों को लेकर टनकपुर पहुंची पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस स्टेशन पहुंचने से पहले अचानक उल्टी दौड़ पड़ी। घटना का पता चलते ही रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। आननफानन अलर्ट जारी करते हुए टनकपुर से खटीमा तक के फाटकों को बंद कराया गया। है।
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ट्रेन को 24 किमी दूर खटीमा से पहले लालकोठी के पास किसी तरह रोका जा सका। तब जाकर ट्रेन में सवार यात्रियों के साथ रेलवे के अधिकारियों ने राहत की सांस ली। घटना की जांच के लिए जेए ग्रेड के तीन अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है।
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एक अनुमान के मुताबिक हादसे के वक्त 55 से 60 यात्री ट्रेन में सवार थे। इधर, देर रात पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज सिंह और इज्जतनगर रेलवे मंडल के डीआरएम आशुतोष पंत ने बताया कि मामले में लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड को निलंबित कर दिया गया