उत्तराखंड के चंपावत में स्वांला में आए भारी मलबे से पहाड़ी दरक गई। इस कारण टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग सोमवार को पूरी तरह बंद रहा। मलबे में भारी पत्थरों के साथ पांच पेड़ भी जमींदोज हो गए। सुबह सवा आठ बजे से बंद इस सड़क के मंगलवार दोपहर तक खुलने के आसार नहीं है।
टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे: स्वांला में दरकी पहाड़ी, भारी मलबे के साथ सड़क पर आ गिरा 'पहाड़', तस्वीरें...
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बाद में काम तो शुरू हुआ, लेकिन बीच-बीच में मलबा आने से काम रोकना पड़ा। वाहनों के फंसे होने से यात्रियों को परेशानी हुई, लेकिन बाद में प्रशासन ने यात्रियों को वापस भेज दिया और टनकपुर, चंपावत की ओर से आवाजाही को रोक दिया गया। तहसीलदार ज्योति धपवाल ने मौका मुआयना कर तेजी से काम करने के एनएच खंड को निर्देश दिए।
साथ ही पिछले महीने भूस्खलन से खतरे की जद में आए स्वांला गांव के तीन परिवारों को सुरक्षित स्थान पर जाने की हिदायत दी है। वहीं डीएम विनीत तोमर का कहना है कि स्वांला में काम चल रहा है, लेकिन मलबा बहुत ज्यादा होने से सड़क खोलने में मंगलवार शाम तक का समय लग सकता है। आवाजाही को सुचारू रखने के लिए मार्ग को डायवर्ट किया गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग में स्वांला के पास पहाड़ी दरकने से रोडवेज सेवा पर असर पड़ा है। सोमवार को आठ बस सेवाएं प्रभावित हुईं। पांच बसों का संचालन देवीधुरा होकर किया गया। एनएच बंद होने से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। सहायक मंडलीय प्रबंधक नरेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि देवीधुरा होकर हल्द्वानी और दिल्ली के लिए दो-दो और देहरादून के लिए एक बस भेजी गई। हालांकि दिल्ली, देहरादून, बरेली की दो-दो और ऋषिकेश, गुरुग्राम की एक-एक बस सेवा का संचालन नहीं हो सका। सड़क बंद होने से 250 से अधिक लोग आठ किमी पैदल चलकर गाड़ियां बदलकर लोहाघाट पहुंचे।
वहीं, निर्माणाधीन बारहमासी सड़क तीन माह में 21 से अधिक बार बंद हो चुकी है। इसमें पिछले महीने भारतोली में सात दिन और मई में स्वांला के पास तीन दिन तक सड़क बाधित रही। सड़क के इस बुरे हाल और बंद मार्ग को खोलने में हो रही लापरवाही से लोगों में आक्रोश पनप रहा है।