अभी तक सिर्फ तस्वीरों और खबरों तक सीमित रही गर्तांग गली जल्द ही पर्यटकों की आवाजाही के लिए खुल जाएगी। लोक निर्माण विभाग द्वारा 64 लाख रुपये लागत से 136 मीटर लंबी गर्तांग गली का पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले यात्रा सीजन में पर्यटक यहां करीब तीन सौ मीटर गहरी खाई के ऊपर खड़ी चट्टान से गुजरने वाली गर्तांग गली पर चलने के रोमांच का लुत्फ ले सकेंगे। आजादी से पूर्व तिब्बत के साथ व्यापार के दौर में उत्तरकाशी से नेलांग वैली होते हुए तिब्बत तक ट्रैक बना था। इस ट्रैक पर भैरोंघाटी के निकट खड़ी चट्टान वाले हिस्से में पेशावर के पठानों ने जाड़ गंगा के ऊपर चट्टान में लोहे की रॉड गाड़ कर और उसके ऊपर लकड़ी बिछाकर रास्ता तैयार किया था। बेहद संकरा और जोखिम भरा यह रास्ता गर्तांग गली के नाम से प्रसिद्ध हुआ। तिब्बत के व्यापारी तथा सीमावर्ती नेलांग एवं जाढ़ूंग गांव के ग्रामीण इसी रास्ते से होकर आवाजाही करते थे। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सीमावर्ती नेलांग और जाढ़ूंग गांव को खाली कराए जाने और तिब्बत के साथ व्यापार बंद होने के बाद से गर्तांग गली उपयोग से बाहर हो गई। बीते करीब छह दशक से उपयोग में न आने और देखरेख के अभाव में यह जर्जर हो चुकी है।
300 मीटर गहरी खाई के ऊपर खड़ी चट्टान से गुजरने वाली गर्तांग गली पर चलने का रोमांच जल्द उठा सकेंगे आप, तस्वीरें
पंकज गुप्ता, अमर उजाला, उत्तरकाशी
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 21 Mar 2021 03:48 PM IST
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