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दरक रहा 'नैनीताल': 155 साल से नासूर बनी नैनीझील से लगी ये पहाड़ी, साल दर साल बिगड़ रहे हालात, तस्वीरें

Thu, 28 Jul 2022 02:54 PM IST
अलका त्यागी चंद्रेश पांडे, अमर उजाला, नैनीताल
चंद्रेश पांडे, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 28 Jul 2022 02:54 PM IST
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Uttarakhand News: Landslide Continue fom baniyala Hill in nainital photos
बनियानाल में दरक रही पहाड़ी - फोटो : अमर उजाला

मानसून की आहट के साथ ही नैनीताल के तल्लीताल क्षेत्र से लगा बलियानाला क्षेत्र भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो जाता है। तकरीबन डेढ़ सौ साल से बलियानाला की पहाड़ी दरक रही है। पहाड़ी के ट्रीटमेंट के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है। 



इस बार भी इस संवेदनशील पहाड़ी से सटे क्षेत्रों में रह रहे करीब 55 परिवारों को वहां से अन्यत्र शिफ्ट होने संबंधी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। स्थायी ट्रीटमेंट तो तब हो जब यह पता चले कि कैसे इस पहाड़ी के भूस्खलन को रोका जाए।

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विडंबना है कि आज तक न तो भू वैज्ञानिक और न ही संबंधित विभाग बलियानाला के मर्ज की दवा खोज पाए हैं।  बलियानाला क्षेत्र में भूस्खलन का इतिहास 155 साल पुराना है। हाल के वर्षों में यह अधिक खतरनाक हो गया है। यदि युद्ध स्तर पर इसका उपचार नहीं हुआ तो नैनीताल शहर और झील के लिए यह भूस्खलन बड़ा खतरा साबित हो सकता है। यह पहाड़ी नैनीझील की जड़ में है। इसी पहाड़ी की तलहटी से होकर नैनीझील का अतिरिक्त पानी बाहर निकलता है। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1867 में बलियानाला में सबसे पहले भूस्खलन हुआ था। उसके बाद वर्ष 1889 में हुए भूस्खलन में वीरभट्टी-ज्योलीकोट रोड ध्वस्त हुई। वर्ष 1889 में ही यहां से कैलाखान की ओर भूस्खलन हुआ। 17 अगस्त 1898 के भीषण भूस्खलन में यहां 27 लोगों की जान गई और प्रसिद्ध बियर फैक्ट्री तबाह हो गई। वर्ष 1924 में यहां फिर भारी भूस्खलन हुआ जिसमें एक स्थानीय महिला और दो पर्यटक मारे गए। इस बार यहां स्थित एक रेस्टोरेंट, कुछ दुकानें, पुलिस चेक पोस्ट और राज्यपाल का गैराज जमींदोज हो गए। तब इसकी चपेट में वर्तमान पुलिस लाइन तक का क्षेत्र तक आ गया था। 

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बनियानाल में दरक रही पहाड़ी - फोटो : अमर उजाला

वर्षों से हो रहे इस भूस्खलन से हरिनगर समेत आसपास का पूरा क्षेत्र तो खतरे की जद में है ही अब नगर की ओर भी यह बढ़ने लगा है। वर्ष 2018 में जिला प्रशासन ने इसके उपचार के लिए जायका योजना के तहत 620 करोड़ की योजना बनाई गई थी लेकिन योजना कारगर साबित नहीं हुई। हालात देखते हुए जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र से 28 परिवारों को वर्ष 2014 में, 25 परिवारों को 2016 में और 45 परिवारों को वर्ष 2019 में दुर्गापुर में बने आवासों में शिफ्ट किया। इस बार भी पालिका ने 55 परिवारों को आवास खाली करने के नोटिस दिए हैं।

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बनियानाल में दरक रही पहाड़ी - फोटो : अमर उजाला

नैनीझील से सटी ठंडी सड़क की पहाड़ी में बीते एक साल से रुक रुककर भूस्खलन हो रहा है। इस पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अब तक नैनीझील में समा चुका है। यही नहीं भूस्खलन के कारण डीएसबी परिसर का एक छात्रावास भी जमींदोज होने की स्थिति में है। इस पहाड़ी के ट्रीटमेंट में भी अब तक लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं लेकिन नतीजा शून्य ही रहा है। 

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बनियानाल में दरक रही पहाड़ी - फोटो : अमर उजाला

मल्लीताल क्षेत्र से सटा सात नंबर क्षेत्र भी भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। पिछले कई साल से यह पहाड़ी भी अलग-अलग स्थानों पर दरक रही है जिससे आवासीय क्षेत्र को खतरा पैदा हो गया है। हाल के दिनों में भी यहां एक बड़ा भूस्खलन हुआ था लेकिन संयोगवश तब जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था।

शोध और अनुसंधान से पता चला है कि बलियानाला की पहाड़ी हर वर्ष 60 सेंटीमीटर से एक मीटर तक खिसक रही है। यह बहुत ही गंभीर स्थिति है। यदि इसी तरह धीरे-धीरे भूस्खलन होता रहा तो नैनीताल ही नहीं बल्कि ज्योलीकोट क्षेत्र को भी खतरा पैदा हो सकता है। पहाड़ी पर भूस्खलन को रोकने के लिए उत्तरकाशी में वरुणाव्रत पर्वत के भूस्खलन को रोकने के लिए किए गए उपायों की तरह ही कार्ययोजना बनानी होगी।
- प्रो. बीएस कोटलिया भूगर्भ वैज्ञानिक 

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बनियानाल में दरक रही पहाड़ी - फोटो : अमर उजाला

नैनीताल में बलियानाला, ठंडी सड़क और सात नंबर क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन को लेकर सरकार और जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है। भूस्खलन को कैसे रोका जा सकता है इस संबंध में आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों के अलावा विशेषज्ञ भू वैज्ञानिकों की राय ली गई है। विशेषज्ञों की राय के अनुरूप ही कार्य कराया जाएगा। 
- धीराज सिंह गर्ब्याल जिलाधिकारी नैनीताल।

बलियानाला की पहाड़ी में हो रहे भूस्खलन पर रोक लगाने के लिए भू वैज्ञानिकों की टीम से सर्वे कराया जा चुका है। इसके ट्रीटमेंट में लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस संबंध में शासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। 
- केएस चौहान, ईई, सिंचाई विभाग।

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