एक दिवसीय दौरे पर देहादून पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राज्य में आप की सरकार बनने पर हर माह प्रति परिवार तीन सौ यूनिट मुफ्त बिजली देने का एलान कर उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है। उनके इस एलान के बाद राज्य के प्रमुख नेताओं की प्रक्रिया सामने आई है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार सस्ती और 24 घंटे बिजली की दिशा में काम कर रही है। दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में आयोजित प्रेस वार्ता में धामी ने कहा कि वह उत्तराखंड में सस्ती और 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने पर लगातार कार्य कर रहे हैं।उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर वार किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को पहले दिल्ली की जनता से किए गए वादों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। बलूनी ने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली में फ्री बिजली का वादा किया था, मगर हर बिल के साथ सरचार्ज, एनर्जी चार्ज, फिक्स चार्ज के नाम पर हर उपभोक्ता से पैसे वसूले जा रहे हैं।
उत्तराखंडः राजनीतिक पार्टियों को 300 यूनिट का 'करंट' लगा गए केजरीवाल, पढ़ें प्रमुख नेताओं ने क्या कहा...
अनिल बलूनी ने कहा कि फ्री पानी की घोषणा करने वाले केजरीवाल टैंकरों से पानी पिला रहे हैं। मोहल्ला क्लीनिक की सच्चाई कोरोना काल में जगजाहिर हो चुकी है। कहा कि आपने दिल्ली में कोई नया अस्पताल नहीं खोला। स्कूलों को लेकर किया गया प्रचार हवाई साबित हुआ है। उत्तराखंड की जनता जागरूक है। केवल फ्री के फार्मूले से आप सत्ता के सपने न देखें। सीसीटीवी महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एक इंच भी आगे न बढ़ना आपके चुनावी हथकंडों को उजागर कर चुका है। कहा कि हमें लगा था कि केजरीवाल दिल्ली के झूठ का देवभूमि में प्रायश्चित करेंगे, मगर आपने एक कदम और आगे बढ़ कर वोट के लिए चुनावी दाना डालने का एक परिपक्व जनमानस वाले प्रदेश में असफल प्रयास किया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का चुनाव को लेकर तमाम तरह के लुभावने वायदे और आडंबर का उत्तराखंड में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। केजरीवाल ने दिल्ली, देश और अब उत्तराखंड में झूठ बोला है और इसके लिए उनको प्रायश्चित करना चाहिए। केजरीवाल अपने दल में स्वयंभू अध्यक्ष हैं और कोई उनकी नीतियों से असंतुष्ट हो तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। आंदोलन के समय जितने लोग जुड़े थे आज उनके स्थान पर पूंजीपतियों और दूसरे लोगों ने स्थान बना लिया है। दिल्ली को छोड़कर देश के किसी भी राज्य में आप को जमने का मौका लोगों ने नहीं दिया और इसका कारण सत्ता हसिल करने के लिए झूठे वायदे और हर जगह फ्री का चुग्गा डालने की कोशिश है।
कोविड के दौरान दिल्ली सरकार और केजरीवाल की असलियत खुलकर सामने आ गई। कोई भी नए अस्पताल आप सरकार के कार्यकाल में नहीं बने और मोहल्ला अस्पतालों के दावे खोखले निकले। उत्तराखंड के कोटे से भी ऑक्सीजन लेना, आवश्यकता से चार गुना ऑक्सीजन डंप करना, कालाबाजारी और देश के सबसे अधिक संक्रमित और डेथ रेट में अग्रणी राज्य का तगमा भी दिल्ली ने हासिल किया। दिल्ली में प्राइवेट अस्पतालों को सरकार का संरक्षण लूट के लिए मिला और सरकारी अस्पतालों की कलई खुल गई, जिन्हें लेकर केजरीवाल कहते नहीं थक रहे थे। वहीं अदालत को गुमराह करने में भी पीछे नहीं रहे। केजरीवाल का उत्तराखंड प्रेम भी तब देखा गया जब राज्य के लोगों को बॉर्डर पर छोड़ दिया गया और पल्ला झाड़ गए।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की सत्ता में दूसरा टर्म है और वहां वह लोगों 200 यूनिट तक बिजली फ्री दे रहे हैं। इससे एक यूनिट भी ज्यादा होने पर पूरा बिल वसूला जाता है। दिल्ली में वाणिज्यिक बिजली दर सात रुपये 75 पैसा प्रति यूनिट है। जबकि उत्तराखंड में पांच रुपये 80 पैसा प्रति यूनिट देना पड़ता है। हरीश ने कहा कि फिर दिल्ली की आमदनी और उत्तराखंड की आमदनी का कोई मुकाबला नहीं है। यदि उत्तराखंड का बजट भी दिल्ली के वार्षिक बजट के बराबर हो तो कांग्रेस 400 यूनिट तक बिजली का बिल माफ कर देगी। राज्य के संसाधनों को देखकर हमारा वादा है कि सत्ता में आने के पहले वर्ष में हम 100 यूनिट और दूसरे वर्ष में 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त देंगे।