उत्तराखंड में आज बूढ़ी दिवाली यानी इगास पर्व धूमधाम से मनाया गया। इगास पर्व दिवाली के 11वें दिन मनाया जाता है। इगास को लेकर आम से लेकर खास तक सभी में उत्साह दिखा। मंत्रियों ने भी भैलो खेलकर इगास मनाया। वहीं, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रदेशवासियों को इगास की बधाई दी।
Uttarakhand: दिवाली के 11वें दिन यहां मनता है रोशनी का त्योहार, जानें क्या है इगास और कैसे मनाते हैं उत्सव
इगास के दिन घरों में कोठार (अनाज रखने के लिए लकड़ी का बर्तन) में नया अनाज भी भरा गया। इगास पर्व को लेकर मान्यता है कि भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की सूचना 11 दिन बाद मिलने के कारण दिवाली के 11वें दिन पर्व मनाया जाता है।
वहीं कई जगह कहा जाता है कि वीर माधो सिंह भंडारी तिब्बत युद्ध पर गए थे और दिवाली तक लौटे नहीं। ऐसे में क्षेत्र में दिवाली नहीं मनाई गई। इसके बाद वीर माधो सिंह भंडारी दिवाली के 11वें दिन युद्ध जीतकर लौटे तो उनके लौटने की खुशी में क्षेत्रभर में धूमधाम से दिवाली मनाई गई।
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इगास मनाते मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
छिद्दरवाला में युवक मंगल दल और महिला मंगल दल की ओर से इगास महोत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने लोगों के साथ भैलो खेला। उन्होंने आयोजक समिति को 11 हजार रुपये दान स्वरूप भेंट किए।
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इगास पर कार्यक्रम में प्रस्तुति देतीं मंत्री रेखा आर्य
- फोटो : अमर उजाला
साहिया के बोहरी गांव स्थित परशुराम देवता मंदिर में आयोजित इगास मेले एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने भी प्रस्तुति दी। उन्होंने सभी को लोगों को इगास पर्व की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि हमारे परिधान ही हमारी पहचान हैं। हमें त्योहारों और खास मौकों पर अपने पारंपरिक परिधान ही पहनने चाहिए। इस दौरान वे लोक गीतों पर जमकर थिरकीं।
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उत्तराखंड में इगास
- फोटो : अमर उजाला
राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी इस वर्ष इगास पर्व पर अपने पैतृक गांव नकोट नहीं आ पाए। उन्होंने अपने प्रतिनिधि संजय बलूनी को गांव भेजा और दूरभाष पर लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही सबके बीच आएंगे। गांव पहुंचे सांसद प्रतिनिधि संजय बलूनी ने गो माता की पूजा की और ग्रामीणों के साथ भैलो भी खेला।
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उत्तराखंड में इगास
- फोटो : अमर उजाला
टिहरी में उत्तराखंड राज्यांदोलनकारी मंच की ओर से इगास दिवाली पर गोष्ठी आयोजित की गई। बौराड़ी व्यापार मंडल सभागार में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि इगास बग्वाल उत्तराखंड की पुरानी संस्कृतिक का प्रतीक है। इस दौरान लोगों ने भैलो खेलकर खुशियां मनाई।