चमोली जिले से लगे चीन सीमा क्षेेत्र के रैणी गांव के किनारे बहने वाली ऋषिगंगा में चंद मिनटों में ही मजदूर और ग्रामीण समा गए। जो मजदूर लापता हैं, उनके परिजन दिनभर अपनों की तलाश करते रहे। लोगों ने कहा कि ऐसा मंजर आंखों के सामने पहली बार देखा है।
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चमोली में तपोवन डेम
- फोटो : अमर उजाला
किसी को उम्मीद नहीं थी कि शांत बहने वाली ऋषिगंगा इतना विकराल रूप धारण कर सकती है। इस घटना में कई मजदूर बेघर हो गए तो कई नेपाली मजदूर अपनों को ढूंढते रहे। ऋषिगंगा के रौद्र रूप को देख परियोजना में काम करने वाले मजदूर और ग्रामीण सहमे हुए हैं।
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चमोली में आपदा
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रैणी गांव की तलहटी से निकलने वाली ऋषिगंगा अब मलबे में तब्दील हो गई है। यहां जल विद्युत परियोजना मलबे में दफन हो गई है। वहीं यहां काम कर रहे मजदूरों के भारी संख्या में दबेे होने की आशंका है। रैणी के साथ ही आसपास के गांवों में करीब दो हजार ग्रामीण रहते हैं। सुखद रहा कि ये गांव नदी के दोनों छोर पर पहाड़ियों पर बसे हैं, जिससे ग्लेशियर टूटने के बाद मलबे और पानी के सैलाब से गांव पूरी तरह सुरक्षित रहे।
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चमोली में आपदा
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रविवार सुबह साढ़े नौ बजे ग्रामीण अपने-अपने काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे कि पहाड़ियों के बीच से धुएं के साथ पानी और मलबे का सैलाब आते देख अफरा-तफरी मच गई। लोग एक दूसरे को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए चिल्लाने लगे। करीब पंद्रह मिनट में ही पानी मलबे के साथ रैणी गांव की तलहटी तक पहुंच गया।
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कई फीट ऊपर उफान पर जाकर नीचे गिर रहा था मलबा
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रैणी गांव के प्रेम सिंह (47) ने बताया कि किसी को उम्मीद नहीं थी कि ऋषिगंगा इतना विकराल रूप धारण कर सकती है। पैंग गांव के शंकर का कहना है कि मलबा कई फीट ऊपर उफान पर जाकर नीचे गिर रहा था। अचानक आए इस सैलाब को कोई समझ नहीं पाया। हर कोई अपना काम छोड़कर इस प्राकृतिक घटना को देखते ही रह गया। सभी परिजनों को फोन कर उनकी कुशलक्षेम पूछने लगे।