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चमोली ऋषिगंगा आपदाः पांच से सात फरवरी के बीच नीती घाटी में बढ़ गया था इतना तापमान

Wed, 10 Feb 2021 11:50 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 10 Feb 2021 11:50 AM IST
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Uttarakhand Glacier Burst Chamoli News: Between 5 and 7 February temperature in Neeti Valley rose this much
अमेरिकी वैज्ञानिकों की ओर से साझा की गई तस्वीर - फोटो : https://blogs.agu.org/

चमोली की नीती घाटी में आई प्राकृतिक आपदा को लेकर वैज्ञानिकों द्वारा तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। इसरो व भारतीय सुदूर संवेदी संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक कार्टोसेट सैटेलाइट के जरिये मिलीं तस्वीरों से पता चलता है कि ऋषिगंगा नदी के शुरुआती छोर के पहाड़ पर बहुत बड़ी चट्टान है, जिस में दरार पड़ी हुई थी।

Uttarakhand Glacier Burst Chamoli News: Between 5 and 7 February temperature in Neeti Valley rose this much
चमोली में आपदा के बाद का नजारा - फोटो : अमर उजाला, फाइल

चट्टान के अंदर काफी मात्रा में पानी भी जमा था। वहीं चट्टान के ऊपरी खुले हिस्से में भारी मात्रा में बर्फ जमा थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक पहाड़ी के नीचे बहुत तेज ढलान वाली खाई थी। जिसमें तीनों ओर से लाखों टन बर्फ जमा थी।

Uttarakhand Glacier Burst Chamoli News: Between 5 and 7 February temperature in Neeti Valley rose this much
चमोली में आपदा के बाद का नजारा - फोटो : अमर उजाला, फाइल

वैज्ञानिकों के मुताबिक पांच से सात फरवरी के बीच इलाके के तापमान में औसतन सात से आठ डिग्री सेंटीग्रेड की अचानक बढ़ोतरी हो गई। परिणामस्वरूप चट्टान के भीतर और अधिक पानी जमा हो गया। भारी दबाव के चलते बर्फ से ढकी चट्टान तेज धमाके साथ टूट गई।

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ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना - फोटो : अमर उजाला, फाइल

ढलान बहुत अधिक होने की वजह से मलबे के कारण और अधिक चट्टान टूटने के साथ भारी मात्रा में मलबा तेजी से नीचे आया जो भारी तबाही का कारण बना। वैज्ञानिकों के मुताबिक, आगे और तेज ढाल व गहरी खाई होने से ऊपर से आए मलबे का बहाव और तेज हो गया।

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इसी जगह पर था ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट - फोटो : अमर उजाला, फाइल

परिणामस्वरूप पहले ऋषिगंगा प्रोजेक्ट और उसके बाद तपोवन प्रोजेक्ट तबाह हो गया। लेकिन, इन जलविद्युत परियोजनाओं के आगे नदी की चौड़ाई बढ़ने के साथ ही ढलान भी कम हो गया, जिससे नदी का प्रवाह कम हो गया। नीती घाटी के निचले वाले इलाकों में पहुंचते-पहुंचते नदी में मलबे की मात्रा फैलने के साथ ही उसका बहाव कम हो गया।

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