चुनाव के दौरान दिन रात एक करने वाले और एक-एक वोट पर नजर रखने वाले प्रत्याशियों ने मतदान के अगले दिन पहले तो चुनाव की थकान उतारी और फिर कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग क्षेत्र में मिले। मतों के आधार पर जीत के गुणा-भाग में जुट गए। किस बूथ तपर मैनेजमेंट कमजोर रहा और कहां के मतदाताओं का रुझान उनके पक्ष में रहा।
इस बारे में कार्यकर्ताओं से देर शाम तक प्रत्याशी चर्चा करते रहे। इसके अलावा प्रत्याशियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में फोन करके सियासी पंडितों और पत्रकारों से भी फीडबैक लिया। एक दिन पहले तक कार्यकर्ताओं की भीड़ से घिरे रहने वाले ज्यादातर विधायक और प्रत्याशी मंगलवार को अकेले घूमते रहे।
सुबह ज्यादातर प्रत्याशी और कार्यकर्ता देर से घर से निकले। उन्होंने आराम करके चुनाव की थकान और खुमारी उतारी। परिवार के साथ समय भी बिताया। हालांकि दोपहर बाद प्रत्याशियों से मिलने के लिए कार्यकर्ता उनके घर, कार्यालय पर पहुंचे और मतों का गुणा-भाग करते नजर आए। देर शाम तक प्रत्याशियों के आवास और चुनाव कार्यालय में कार्यकर्ता जुटे रहे।