चमोली जिले में मानसूनी बारिश आफत का सबब बनी हुई है। थराली, देवाल, घाट और दशोली क्षेत्र में आठ पैदल पुल क्षतिग्रस्त पड़े हुए हैं। जिससे ग्रामीण गाड़-गदेरों (बरसाती नाला) पर बल्लियां बिछाकर जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। सबसे अधिक दिक्कत वाण, कुलिंग और घाट क्षेत्र में बनी हुई है। लोक निर्माण विभाग कर्णप्रयाग के अधीन चुफलागाड पर निर्मित पैदल पुल क्षतिग्रस्त पड़ा हुआ है, जिससे ग्रामीण गाड पर बल्लियों के सहारे आवाजाही कर रहे हैं।
उत्तराखंड 'जलप्रलय': यहां जान जोखिम में डालकर कुछ इस तरह पुल बनाने में जुटे ग्रामीण
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वाण गांव के बुरुकोट गदेरे में 15 जुलाई की रात को बादल फटा था। जिससे क्षेत्र में आवाजाही के पांच छोटे-बड़े पैदल पुल बह गए हैं। जिससे ग्रामीण लोहाजंग बाजार तक पहुंचने के लिए बीस किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर रहे हैं। यहां वाण-लोहाजंग मोटर मार्ग पर कुलिंग और बुरुकोट गदेरे में मोटर पुल बह गए हैं। जिससे यहां वाहनों की आवाजाही भी ठप पड़ी हुई है।
15 जुलाई को ही घाट क्षेत्र के आपदा प्रभावित कुंडी और मोखबगड़ गांव में बरसाती गदेरे में बादल फटने से क्षेत्र में तीन पैदल पुलिया बह गईं थीं। लेकिन प्रशासन की ओर से आवाजाही की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई है। कुंडी गांव के ग्रामीणों द्वारा स्वयं गदेरे में लकड़ी की बल्लियां बिछाकर आवाजाही की जा रही है। विधायक प्रतिनिधि कृष्णा बिष्ट और कुंवर सिंह बिष्ट का कहना है कि जगह-जगह पुल क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित वाण गांव तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। क्षेत्रीय विधायक मुन्नी देवी शाह ने क्षेत्र का भ्रमण किया और ग्रामीणों को मदद का भरोसा दिलाया है।
जिले में 18 ग्रामीण सड़कें भी अवरुद्ध पड़ी हुई हैं। 76 सड़कें यातायात के लिए खुली तो हैं, लेकिन इन पर वाहनों की आवाजाही खतरनाक बनी हुई है। जिससे ग्रामीण गाड-गदेरों के ऊपर बल्लियों के सहारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पैदल रास्ते भी क्षतिग्रस्त पड़े हुए हैं। सबसे अधिक दिक्कत थराली और देवाल क्षेत्रों में बनी हुई है।
जिले के आपदा प्रभावित गांवों में तीन माह तक की एडवांस रसद भिजवाई गई है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को क्षतिग्रस्त और बह गए पुलों के निर्माण के लिए स्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। वाण गांव में बुरुकोट गदेरे का जलस्तर कम होने के बाद यहां क्षतिग्रस्त मोटर पुल के स्थान पर आवाजाही की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
- मोहन सिंह बर्निया, अपर जिलाधिकारी, चमोली