उत्तराखंड की ऋषि गंगा में आई बाढ़ के बाद अमर उजाला की टीम प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति जानने सोमवार सुबह मौके पर पहुंची तो हर जगह का नजारा चौंका देने वाला था। रैणी से लेकर तपोवन नदी में जिधर देखो उधर बस मलबा और गाद ही दिखी। लोग अपनों की तलाश में जहां बचाव दल को निहार रहे थे, वहीं मलबे में कई परिवारों की खुशियां दफन होती दिखीं।
2 of 5
चमोली में आपदा के बाद रेस्क्यू अभियान
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को आई आपदा से तपोवन, रिंगी, करछो, रैणी समेत कई गांव प्रभावित हुए। रैणी गांव में सोमवार सुबह जब मौके पर पहुंचे तो बचाव दल ने रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया था। अपनों की तलाश में आंसुओं से लाल हुई लोगों की आंखें फिर से एक आस लेकर बचाव दल को निहार रही थीं कि हमारा अपना जल्दी मिल जाए।
3 of 5
चमोली में आपदा के बाद रेस्क्यू अभियान
- फोटो : अमर उजाला
तपोवन बाजार तो बंद रहा, लेकिन घटनास्थल पर लोगों का जमावड़ा लगा रहा। रैणी गांव से लेकर तपोवन तक जहां भी नजर दौड़ाओ नदी में सिर्फ गाद और मिट्टी ही दिखी। इसी मलबे में कई परिवारों की खुशियां दफन हो गईं हैं। पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा रहा।
4 of 5
चमोली में आपदा के बाद रेस्क्यू अभियान
- फोटो : अमर उजाला
तपोवन से लेकर रैणी में लोगों की भीड़ लग गई। स्थानीय निवासी ओम प्रकाश डोभाल और रूप सिंह ने अमर उजाला की टीम को बताया कि प्रकृति के इस रौद्र रूप ने सभी को हिलाकर रख दिया है। लोगों की जुबान पर सिर्फ यही घटना है। वहीं जिनके परिजन इस आपदा में खो गए उनके आंखों से आंसू छलकते रहे।
5 of 5
इसी जगह पर था ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट
- फोटो : अमर उजाला
वह अपनों की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे कि काश वह हमें यहीं मिल जाएं। वहीं रैणी के पास ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट वाले स्थान पर मिट्टी के अलावा और कुछ नजर नहीं आया। वहां के मंजर को देखकर यकीन नहीं हो रहा था कि रविवार सुबह नौ बजे तक जहां पावर प्रोजेक्ट पर काम हो रहा था वहां अब नदी में भारी भरकम पत्थर और मिट्टी ही है। नदी अपने पहले के स्वरूप से 100 फीट तक ऊपर उठ गई है।