उत्तराखंड में आगामी 14 फरवरी को विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होना है। इसी क्रम में इन दिनों उत्तराखंड में प्रत्याशियों के नामांकन का दौर चल रहा है। शुक्रवार 28 जनवरी को नामांकन का आखिरी दिन है। वहीं गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य के अन्य दिग्गजों ने भी नामाकंन पत्र दाखिल कर दिया है। सुबह से शुरू हुआ यह सिलसिला दोपहर बाद तक जारी हुआ। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत शुक्रवार को लालकुंआ से नामाकंन दाखिल करने वाले हैं।
गुरुवार को खटीमा सीट से नामांकन से पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डोर-टू-डोर प्रचार के माध्यम से क्षेत्र की जनता से भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने अपने कुल देवता की पूजा-अर्चना भी और घर के बड़ों का आशीर्वाद भी लिया।
वर्ष 1952 से अस्तित्व में आई खटीमा विधानसभा सीट का तीन बार विभाजन हो चुका हैं। वर्ष 1952 से 1971 तक सामान्य रही इस सीट में पीलीभीत, जहानाबाद, ओखलकांडा, धारी, नैनीताल के वोटर भी शामिल थे। तब यह विधानसभा सीट खटीमा-नैनीताल विधानसभा क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी। तब इस विधानसभा सीट से होरी लाल, प्रताप भैय्या, डूगर सिंह बिष्ट ने यूपी सरकार में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1970 के दौरान पीलीभीत और नैनीताल को अलग करके खटीमा विधानसभा सीट निर्धारित की। नए सीमांकन के बाद हुए चुनाव में इंद्र लाल पहले विधायक बने।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2012 में फिर से हुए परिसीमन में खटीमा विधानसभा सीट सामान्य हो गई तब भाजपा के पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र चंद को और अगले चुनाव 2017 में कांग्रेस प्रत्याशी भुवन चंद्र कापड़ी को हराया।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
- फोटो : अमर उजाला
खटीमा विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार मिली जीत और युवाओं के बीच अच्छी पकड़ के बीच सभी दिग्गजों को पीछे छोड़ पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बने। भले ही उनका कार्यकाल छह महीने का रहा लेकिन उन्होंने कम समय में धुआंधार बैटिंग करके विपक्ष को परेशान करने का भी काम किया।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समर्थक
- फोटो : अमर उजाला
खटीमा विधासभा सीट में वर्ष 2002 एवं 2007 में कांग्रेस का परचम लहराया। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह राणा ने भाजपा प्रत्याशी सुषमा राणा एवं गोपाल सिंह राणा चांदा को पराजित किया।