बुधवार को देवभूमि उत्तराखंड में हो रहे 'दंगल' में हो रहे मतदान में सूबे के इन नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। आइए जानते हैं इनके बारे में...
उत्तराखंड: EVM में कैद हुई इन दिग्गजों की किस्मत
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कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदेश कांग्रेस ही नहीं राज्य में अकेली महिला राजनीतिज्ञ है जो अपने दम पर सियासत करती है। चुनाव जीती और संख्याबल बहुमत की कसौटी पर खरा उतर तो वह मुख्यमंत्री के पद की दावेदार होंगी और चुनाव हार गयी तो यह उनका आखिरी चुनावी रण साबित होगा।
जनजाति बाहुल्य सीट चकराता प्रीतम सिंह की परंपरागत सीट मानी जाती है। वह पिछले दो दशक से लगातार विधायक है। प्रीतम सिंह के सामने मधु चौहान भाजपा के टिकट पर मैदान में है। चकराता क्षेत्र में मंदिर में दलितों को प्रवेश करने से रोकने का मामला उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के साथ भाजपा में आये नौ क्षत्रपों को जिताना उनकी जवाबदेही में शामिल हो गया है। बहुगुणा पर अपनी राजनीतिक विरासत को सितारगंज से बेटे सौरभ बहुगुणा की जीत दिलवा कर आगे बढ़ाने का दबाव भी है।
केंद्र की राजनीति छोड़ प्रदेश की सियासत में कूदे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सतपाल महाराज की भूमिका इस चुनाव से तय होगी। सीएम की रेस में माने जा रहे महाराज को चौबट्टाखाल से जीतने का दबाव है।