टमाटर की इस मंहगाई को रोकने का कोई उपाय है क्या, इस सवाल के जवाब की तलाश में हमें दून विहार निवासी राजेश कुमार धर्मपुर सब्जी मंडी में मिल गए।
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सब्जी खरीदने में दिखाएंगे ऐसी चालाकी तो दो दिन में उतर जाएगी टमाटर की 'गर्मी'
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 28 Jul 2017 09:18 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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वे टमाटर खरीदने गए थे, उन्होंने रेट पूछा तो पता चला कि 120 रुपये किलो। राजेश के लिए मुश्किल थी कि एक किलो टमाटर खरीदने में उन्हें सीधे 120 रुपये खर्च करने पड़ रहे थे।
1942 में सोलन की सपरुण वैली में पहली बार टमाटर की खेती की गई।
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आलू या अन्य सब्जी और खरीदनी ही पड़ती। राजेश ने तुरंत फैसला लिया। टमाटर खरीदने की बजाय केवल 100 रुपये में करेला, भिंडी, बंदगोभी और बैंगन चारों खरीद लिए।
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देहरादून में लोगों ने इस तरह के ग्रुप बना लिए हैं जो सब्जी खरीदने में चतुराई कैसे दिखाई जाए इसके लिए लोगों को अवेयर कर रहे हैं।
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सुर्ख लाल रंग का लाल सोना टमाटर।
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राजेश का कहना है कि टमाटर क्यों खाना, जब बाजार में सस्ती सब्जियां उससे ज्यादा विटामिन और मिनरल्स से भरपूर हैं। इस तरह राजेश ने सीधे 100 रुपये भी बचा लिए और ज्यादा सब्जियां भी खरीद लीं। 120 रुपए टमाटर के और आलू-गोभी जैसी सब्जी पर मोटे तौर पर 80 रुपए खर्च ही हो जाते।