प्रसिद्ध धाम यमुनोत्री के कपाट शनिवार को वैद्धिक मंत्रोचारण के साथ आम श्रद्धालुओं के लिए बंद हो जायेंगे। कपाट बंद होने का दिन भैया दूज यहां धार्मिक महत्व से विशेष माना जाता है। भैया दूज के दिन मां यमुना से मिलने सूर्य पुत्र यमराज जो यमुना के भाई हैं और चचेरे भाई शनिदेव सहित गुरू भाई भगवान हनुमान मिलने आते हैं। यमुनोत्री धाम में आज के दिन स्नान व पूजा अर्चना करने मात्र से मां यमुना श्रद्धालु के जन्म जन्मातंर के सभी पाप व कष्टों को दूर कर देती है। साथ ही स्नान करने वाले को सूर्य लोक की प्राप्ति होती है।
भैया दूज 2017: आज करेंगे ऐसा तो दूर हो जाएंगे जन्म-जन्मांतर के कष्ट
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बता दें कि मां यमुना के कपाट अक्षय तृतीय के दिन खुले थे और शनिवार को भैया दूज के दिन बंद हो रहे हैं। देश विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किए और कपाट बंद होने के दिन स्थानीय श्रद्धालु व हजारों की संख्या में देशी विदेशी श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं। मन्यता के अनुसार यमुनोत्री धाम चार धामों में सबसे पहला दर्शनीय स्थल है। चारधाम यात्रा के तहत जो भी श्रद्धालु उत्तराखंड आता है वह यहीं से अपनी यात्रा की शुरूआत करता है।
यहां पर महिला और पुरूषों के लिए दो स्नान कुंड भी है। यमुनोत्री धाम के जहां जानकीचट्टी तक मोटर रोड़ की सुविधा है वहीं जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक पांच किमी की दुर्गम खड़ी चढ़ाई चढ कर यात्रियों को यहां आना पड़ता है। पैदल यात्रा के दौरान थका हुआ यात्री इन कुंड में स्नान करता है तो उसकी सारी थकान मिट जाती है। शनिवार को मां यमुना की पूजा अर्चना के बाद भैया दूज के दिन कपाट शीतकाल के लिए छह माह के लिए बंद कर दिए जायेंगे। साथ ही मां यमुना की उत्सव डोली को दुल्हन की तरह सजा कर ढोल नगाड़ों व शंख ध्वनी के साथ खरसाली यानी खुशीमठ लाया जाता है। जहां शीकालीन यमुना मंदिर में मां यमुना की भोग मूर्ति को रखा जाता है और यहीं पर खरसाली में उनियाल जाति के तीर्थ पुरोहित पूजा अर्चना करते हैं।