कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यम द्वितीया एवं भाई दूज कहा जाता है। भाई दूज का यह त्योहार शनिवार को है।
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भाई दूज 2017: इस मुहूर्त में करेंगी भाई का पूजन तो नहीं रहेगा 'यमराज' का डर
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 21 Oct 2017 09:16 AM IST
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बहनों ने लगाया भाइयों के माथे पर तिलक
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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भाईदूज
- फोटो : अमर उजाला
यह पर्व मनाने का शुभ मुहूर्त सुबह 7.50 बजे से 9.15 बजे तक है। जो लोग इस समय त्योहार नहीं कर सकते वह सुबह 10.38 बजे से 1.26 बजे तक भी तिलक कर सकते हैं।
kalash
- फोटो : kalash
मान्यता है कि भाई-दूज के दिन सूर्य पुत्र यम ने अपनी बहन यमुना घर जाकर भोजन कर उपहार भेंट किया था। तभी से यह त्योहार यम द्वितीया एवं भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यम की पूजा के पश्चात यमुना जी की पूजा-अर्चना की जाती है।
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yamraj
- फोटो : AmarUjala
इसके साथ ही इस पर्व पर यमुना में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। पंडित भरत राम तिवारी के अनुसार इस दिन जो भाई अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करते हैं उन्हें यमराज का भय नहीं रहता।
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रक्षाबंधन
- फोटो : श्ााहजहांपुर उत्तर प्रदेश्ा
डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार 20 अक्तूबर को द्वितीया तिथि रात 1.27 बजे प्रारंभ होगी जो कि 21 अक्तूबर को रात 2.50 तक रहेगी। वहीं भाई-दूज का पर्व सुबह 7.50 बजे से 9.15 बजे तक किया जा सकता है। इसके बाद सुबह 10.38 बजे से 1.26 बजे तक भी तिलक का शुभ मुहूर्त रहेगा। प्रात: 9.15 बजे से 10.38 बजे तक राहुकाल रहेगा।