सर्दियों में हिमालय ने वैज्ञानिकों को ऐसे संकेत दिए हैं। जिन्हें जानकर आप टेंशन में आ जाएंगे। पढ़िए ये खास रिपोर्ट...
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हिमालय ने वैज्ञानिकों को दिए ऐसे संकेत जिन्हें जानकर टेंशन में आ जाएंगे आप
दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा
Updated Mon, 29 Jan 2018 08:47 AM IST
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इस बार जाड़े के सीजन में अभी तक बारिश और बर्फबारी नहीं होने से बर्फ से लकदक रहने वाला हिमालय भी श्रीहीन हो गया है। बारिश न होने का असर सूखे के रूप में सामने है तो हिमालय की बर्फविहीन चोटियां आने वाले दिनों में पानी के संकट का संकेत दे रही हैं।
कौसानी से हिमालय में दिखाई देने सूर्यास्त का नजारा।
- फोटो : amar ujala
वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय क्षेत्र में पूरे जाड़े के सीजन में बर्फबारी नहीं होने से गर्मियों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। बारिश और बर्फबारी नहीं होने से जहां जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाएंगे वहीं हिमालय में बर्फ कम रहने से नदियों में भी पानी कम हो जाएगा।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में ऐसे इलाकों में जाते हैं यारसागंबू ढूंढने
- फोटो : amar ujala
जाड़े का सीजन खत्म होने की ओर है, लेकिन अभी तक पहाड़ में न तो अच्छी बारिश हुई है और न ही बर्फबारी। बीते दिसंबर में उच्च हिमालय क्षेत्र में बर्फ की हल्की चादर बिछी थी जो बीते कुछ दिनों से पड़ रही धूप में साफ हो गई है। हाल ये है कि आमतौर पर मई-जून में बर्फ पिघलने पर ओम पर्वत में दिखाई देने वाली ओम की आकृति अभी से उभरने लगी है।
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जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के निदेशक किरीट कुमार का कहना है कि दिसंबर मासांत से लेकर जनवरी तक बर्फबारी होने पर हिमालय में अच्छी बर्फ जमा हो जाती है लेकिन फरवरी और मार्च में बर्फबारी होने पर हिमालय में बर्फ ज्यादा नहीं टिकती है और तामपान बढ़ने से जल्द पिघलने लगती है। उन्होंने कहा कि बारिश-बर्फबारी नहीं होने से जहां फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है वहीं इससे फलों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। सेब आदि कुछ फलों को ठंड की अधिक आवश्यकता होती है, अन्यथा उनमें अच्छा बौर नहीं आ पाएगा।