शास्त्रों में उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम का बड़ा ही महात्म्य बताया गया है। बुजुर्ग ही नहीं हर उम्र के व्यक्ति इन तीर्थों में आते हैं और धर्म, अर्थ काम सुख में वृद्घि की प्रार्थना करते हैं।
लेकिन उत्तराखंड में ऐसे एक नहीं बल्कि चार और केदार हैं जिनका धार्मिक महत्व केदारनाथ के बराबर है। इन सभी धामों के दर्शन से व्यक्ति की कामना पूर्ण होती है। इन स्थानों में तुंगनाथ के महादेव, रूद्रनाथ, श्रीमध्यमहेश्वर एवं कल्पेश्वर प्रमुख हैं।
भगवान शिव के ये चार स्थान केदारनाथ के ही भाग हैं। इनके विषय में कथा है कि पाण्डवों से नाराज होकर महादेव इन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे। पाण्डव जब महादेव को ढूंढते हुए केदारनाथ पहुंचे तब महादेव भैंस के रूप में प्रकट हुए। पाण्डवों ने इन्हें पहचान लिया।
4 of 9
tungnath
- फोटो : AmarUjala
इनसे बचने के लिए महादेव धरती में विलीन होने लगे। तब तुंगनाथ में महादेव का बाहु, रूद्रनाथ में मुख, श्रीमध्यमहेश्वर में नाभि एवं कल्पेश्वर में जटा प्रकट हुए। तस्वीर में तुंगनाथ धाम।
5 of 9
madhyamaheshwar
- फोटो : wikipedia
केदार नाथ सहित यह चार स्थान मिलकर पंच केदार कहलाते हैं। इनमे से किसी भी स्थान पर शिव की पूजा करने से केदारनाथ की पूजा का फल प्राप्त होता है। तस्वीर में मध्यमहेश्वर धाम।