सड़कों पर बोल्डरों(बड़े पत्थर) की बरसात थमने का नाम नहीं ले रही है। पिथौरागढ़-घाट के बीच बन रही ऑलवेदर रोड पर बुधवार सुबह पहाड़ी दरक गई। पहाड़ी से 12 घंटे तक मलबा और बोल्डर गिरने से दिन भर वाहनों का आवागमन बंद रहा।
दोनों ओर सैकड़ों की संख्या में वाहन फंसे रहे। यात्रियों को घंटों भूखे-प्यासे रहना पड़ा। अपरान्ह तीन बजे तक भी सड़क नहीं खुलने के बाद मैदानी क्षेत्र को जा रही अधिकतर बसें पिथौरागढ़ लौट गईं। समाचार लिखे जाने तक मार्ग बंद था। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि मानसून 28 सितंबर तक सक्रिय रहेगा।
10 से 12 सितंबर के बीच मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश हो सकती है। वहीं, थोड़ी देर मौसम के खुलते ही 17वें दल के 21 यात्रियों को हेली सेवा के जरिये पिथौरागढ़ से गुंजी पहुंचाया गया, जबकि गुंजी से 13वें दल के 15 और 14वें दल के 38 यात्रियों को पिथौरागढ़ लाया गया। गुंजी से आए यात्री दिल्ली को रवाना हो गए हैं।
थल-मुनस्यारी मार्ग पर रातीगाड़ से निपटने के बाद अब बनिक में नया डेंजर जोन बन गया है। मंगलवार शाम बनिक के पास भारी मात्रा में भूस्खलन होने से थल-मुनस्यारी मार्ग बंद हो गया, जो 17 घंटे बाद सुचारु हुआ।
टनकपुर-तवाघाट एनएच खिरचना के पास भारी मात्रा में भूस्खलन होने से चार घंटे से भी अधिक समय तक बंद रहा। अल्मोड़ा-हल्द्वानी मार्ग में ब्राइटन कार्नर के निकट चीड़ का बड़ा पेड़ गिर गया। इससे बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त हो गई और हल्द्वानी मार्ग पर एक घंटे जाम लग गया।