2020 में सोमवती अमावस्या के तीन स्नान हुए। पहला 23 मार्च और दूसरा 20 जुलाई के स्नान पर कोरोना की मार रही। सोमवार को भी कोरोना के खतरे के चलते पुलिस-प्रशासन ने बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं से वहां के प्रशासन की मदद से हरिद्वार नहीं आने की अपील की थी। इसके बाद भी बाहरी राज्यों से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। 2021 में सोमवती अमावस्या का पहला स्नान 12 अप्रैल और दूसरा स्नान छह सितंबर को है।
साल के आखिरी सोमवती अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने गंगा की पूजा अर्चना के साथ गरीबों को दान किया और पुण्य कमाया। सोमवती पर हरकी पैड़ी समेत सभी प्रमुख घाटों पर सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। पुलिस प्रशासन भी सुरक्षा और कोविड मानकोें को पालन करवाने के लिए गंगा घाटों पर सतर्क नजर आई।
सोमवती अमावस्या स्नान पर हर साल उत्तर भारत के श्रद्धालुओं की भीड़ हरिद्वार उमड़ती है। कोविड-19 के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने कुछ शर्तों के साथ गंगा स्नान के लिए अनुमति दे दी थी। सोमवार को गंगा घाटों पर तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। स्नान का मुहूर्त 13 दिसंबर की रात 12.44 बजे से 14 दिसंबर की रात 9.46 बजे तक था। बाहरी प्रदेशों से भी श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंच रहे थे।
सुबह के समय कड़ाके की ठंड के चलते श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। जैसे-जैसे दिन चढ़ा हरकी पैड़ी, मालवीय, नाईसोता, सुभाष, बिरला, प्रेमनगर और गोविंद पुरी घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती चली गई। दोपहर के समय सभी घाटों पर श्रद्धालुओं की खूब चहल पहल थी। हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर पुलिस की कड़ी चौकसी रही। तीन टीमें जल पुलिस की तैनात रही। सुरक्षा की दृष्टि से वॉच टॉवर से पुलिस निगरानी कर रही थी।
हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर पुलिस कोविड-19 के मानकों का पालन कराने के लिए सतर्क रही। अपर रोड पुलिस चौकी और सीसीआर भवन से हरकी पैड़ी पहुंचने वाले रास्तों पर पुलिस तैनात थी। बिना मास्क पहने पहुंचने वालों को टोका गया। घाटों पर भी पुलिस की कई टीमें घूमती रही। मास्क नहीं पहनने वाले श्रद्धालुओं का चालान किया और मास्क बांटे। श्रद्धालुओं को शारीरिक दूरी के प्रति जागरूक किया। कुछ सामाजिक संस्थाओं की ओर से हरकी पैड़ी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के हाथ सैनिटाइज करवाए।