आठ महीने पहले पाक सीमा से लापता हुए उत्तराखंड के जवान राजेंद्र सिंह नेगी का गुरुवार को हरिद्वार में अंतिम संस्कार किया गया। आठ माह से पिता का इंतजार कर रही बेटी अंजलि की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अंजलि ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उनके पिता जरूर लौटेंगे।
नम आंखों से पिता के अंतिम दर्शन करने के बाद अंजलि ने कहा कि पिता से जब भी बात होती थी तो वह कहते थे, बेटा छुट्टी में जरूर घूमने जाएंगे। इस दौरान बेटी ने कहा, वह अपने पिता की शहादत को जाया नहीं जाने देगी। वह सेना में अफसर बनकर अपने देश की रक्षा करेगी। बता दें कि शहीद राजेंद्र की दो बेटियां हैं अंजलि, मीनाक्षी और एक बेटा प्रियांशु है। अंजलि परिवार में सबसे बड़ी हैं।
शहीद राजेंद्र सिंह नेगी के पिता रतन सिंह नेगी के आंखों में आंसू थे। लेकिन, सीना गर्व से चौड़ा था। उन्होंने कहा कि आठ माह पहले जब बेटे के लापता होने की खबर मिली तो उन्हें लगा था कि क्या पता बेटा पाकिस्तान के कब्जे में हो? इस पर उन्हें वापसी की आस थी। लेकिन, कई दिन तक जब उनका कहीं पता नहीं चला तो अनहोनी की आशंका होने लगी थी।
कहा, बेटे के जाने का दुख हर मां-बाप हो होता है, लेकिन उन्हें गर्व है कि उनका बेटा शहीद हुआ है। भाई दिनेश नेगी ने कहा कि अभी तक यह आशंका थी कि अब आगे क्या किया जाए? लेकिन, अब शंकाओं पर विराम लग गया है। कहा, इतना जनसैलाब भाई के अंतिम दर्शन को उमड़ा है, जिससे वह गर्व महसूस कर रहे हैं।
बता दें, मूल रूप से चमोली जिले के पंजियाणा निवासी हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी 11 गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। आठ जनवरी को बारामुला के गुलमर्ग इलाके में ड्यूटी के दौरान एवलांच आने से वह फिसलकर पाकिस्तान की सीमा की तरफ गिर गए थे।