जिस बेटे के लिए घरवाले दुल्हन की तलाश कर रहे थे, वो उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चला गया। शव को देख बहनें भाई से लिपटकर रो पड़ीं। मां और पिता भी घर के इकलौते चिराग को देख बेसुध हो गए। शहीद के घर में अभी भी मातम पसरा हुआ है।
कश्मीर में पत्थरबाजों के हमले में शहीद हुए गंगोलीहाट के राजेंद्र दिवाली पर घर आने वाले थे। घरवाले शादी के लिए उनकी हां का इंतजार कर रहे थे। वहीं परिजन उनके लिए दुल्हन की तलाश भी कर रहे थे। घरवालों ने सोचा था कि दिवाली पर बेटा घर आएगा तो रिश्ते की बात करेंगे, लेकिन इससे पहले ही उसके शहीद होने की खबर आ गई।
शनिवार को सैन्य सम्मान के साथ रामेश्वर घाट में अंत्येष्टि की गई। इसके पहले, शहीद के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही वहां कोहराम मच गया। देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले क्षेत्र के लाल के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। जैसे ही सेना के वाहन से शहीद राजेंद्र की पार्थिव देह उनके बडेना गांव स्थित घर लाई गई, वहां सन्नाटा पसर गया। शहीद के पिता चंद्र सिंह, माता मोहनी देवी और तीनों बहनों सहित अन्य परिजन फफक पड़े।
उनके करुण क्रंदन से सांत्वना देने के लिए पहुंचे लोगों की आंखें भी नम हो गईं। लोगों ने बमुश्किल परिजनों को संभाला। क्षेत्रीय विधायक मीना गंगोला, संयुक्त मजिस्ट्रेट सौरभ गहरवा, तहसीलदार पीआर टम्टा ने भी शहीद के परिजनों को सांत्वना दी। अंतिम दर्शन के बाद शहीद के पार्थिव शरीर को रामेश्वर घाट ले जाया गया, जहां पर सेना की एक टुकड़ी ने उन्हें अंतिम सलामी दी।
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शहीद राजेंद्र परिजन विलाप करते हुए
शहीद राजेंद्र की अंतिम यात्रा में सिनलेख, चौरपाल, पाली, बडेना, बुंगली, खतीगांव, निंगल्टी, चहज, ड्यूल, रौतेड़ा, अस्कोड़ा, टिम्टा, चमडुंगरा, डूनी, नाली सहित आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। उधर, शोक में गंगोलीहाट बाजार बंद रहा। व्यापार संघ अध्यक्ष हरीश धानिक के नेतृत्व में व्यापारियों ने शोक सभा में शहीद को श्रद्धांजलि दी।