हम अपनी जरुरतों के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न दुकानों और सरकारी व अर्द्वसरकारी प्रतिष्ठानों से जुड़े रहते हैं। लेकिन ये दुकान और प्रतिष्ठान आपकी जेब पर डाका डालने में लगे हैं।
दुकानदारों की ये सच्चाई जानकर, कहीं सकते में न आ जाएं आप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तेल कंपनियों के पेट्रोल पंप पर घटतौली पर लगाम कसने को भले ही तमाम हाइटेक इंतजाम किए हो। लेकिन इसके बावजूद भी पंपों पर घटतौली का खेल जारी है। विधिक माप विज्ञान के आंकड़ों के अनुसार एक साल में 22 पेट्रोल पंपों पर घटतौली पकड़े जाना इसकी पुष्टि करता है। घटतौली के इस खेल में सर्राफा व्यापारी भी पीछे नहीं है। सर्राफा की दुकानों पर भी घटतौली और अनियमितता के 95 मामले सामने आए है।
विभाग के उन नियंत्रक एमएस नेगी और वरिष्ठ निरीक्षक अधिकारी प्रवीण नेगी के अनुसार विभाग के कर्मचारियों ने एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक प्रदेश में 40209 जगहों पर निरीक्षण किया। जिसमें 2928 अनियमितता के मामले विभाग की ओर से व्यापारियों के खिलाफ पंजीकृत किए गए। बताया कि इन सभी मामलों में 40 लाख, 32 हजार का प्रशमन शुल्क वसूला गया।
एलपीजी एजेंसी पर 20 मामले, पेट्रोल पंप पर 125 मामले (घटतौली के 22 मामले मिलाकर), सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के 243, सरकारी अर्द्घ सरकारी प्रतिष्ठान के 62, गेहूं क्रय केन्द्र के तीन, आटा चक्कियों के 133, फैक्ट्रियों के 148, सर्राफा व्यापारियों के 95, हार्डवेयर विक्रेताओं के 137, मिठाई विक्रेताओं के 128, गल्ला किराना विक्रेताओं के 706, सब्जी विक्रेताओं के 222, दूध विक्रेताओं के 80, धर्मकांटे के 108 समेत 500 मामलों में अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की गई। इनमें से कुछ मामले घटतौली के भी है।
विधिक माप विज्ञान विभाग के कर्मचारियों ने कम संसाधन होते हुए भी लक्ष्य से अधिक आय अर्जित की है। वर्ष 2016-17 के लिए विभाग को शासन से सभी मदों में तीन करोड़, 35 लाख, छह हजार राजस्व वसूलने का लक्ष्य मिला था, लेकिन विभाग के कर्मचारियों ने तीन करोड़, 92 लाख, 4 हजार से अधिक रुपये का राजस्व वसूला है। बता दें कि विभागीय कर्मचारी देहरादून स्थित तहसील चौक पर जर्जर भवन में काम करने को मजबूर है और उनके पास वाहनों का भी टोटा है।