फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

देशभर में तबाही मचा रहे मौसम को लेकर वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, दिए बड़े खतरे के संकेत!

Tue, 15 May 2018 04:44 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 15 May 2018 04:44 PM IST
विज्ञापन
Scientist revealing about rain and snowfall and change in himalaya
demo pic

आंधी तूफान और बारिश बर्फबारी से देशभर में मच रही तबाही का कारण बन रहे मौसम को लेकर वैज्ञानिकों ने एक खुलासा किया है। आगे जानिए...

Scientist revealing about rain and snowfall and change in himalaya
himalaya

हिमालय का पर्यावरण तेजी से बदल रहा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) रुड़की के शोध में यह खुलासा हुआ है। एनआईएच वैज्ञानिकों के मुताबिक एक ओर जहां बीते 20 वर्षों में हिमालय में बारिश और बर्फबारी का समय बदल गया है, वहीं पश्चिमी विक्षोभ की संख्या में भी कमी आई है। हिमालय के ग्लेशियरों से झील बनने का सिलसिला भी चल निकला है। अब नए सिरे से एनआईएच के वैज्ञानिक गोमुख सहित कई ग्लेशियरों के अध्ययन में जुटे हैं।

Scientist revealing about rain and snowfall and change in himalaya
nih

एनआईएच ने गंगोत्री में अपनी ऑब्जर्वेट्री लगाई हुई है। एनआईएच के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोहर अरोड़ा ने बताया कि 20 वर्षों के भीतर तेजी से हिमालय में पर्यावरणीय परिवर्तन आए हैं। उन्होंने बताया कि बर्फबारी होने और बर्फ टिकने का समय काफी कम हो गया है। पहले दिसंबर से जनवरी माह में बर्फबारी होती थी और फरवरी में बर्फ पिघलती थी लेकिन अब फरवरी में बर्फ पड़ती है। यह बर्फ इतनी कम होती है कि इससे नदियों में सूखे की नौबत आ गई है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
Scientist revealing about rain and snowfall and change in himalaya
Glacier

इसी प्रकार, पश्चिमी विक्षोभ की संख्या में भी बीते 20 वर्षों में कमी आई है। पहले जहां 10 से 15 चक्र पश्चिमी विक्षोभ आते थे लेकिन अब इनकी संख्या पांच से छह रह गई है। मौसम के बिगड़े मिजाज के चलते ही ग्लेशियर भी पिंघलने लगे हैं। इससे झील बनने का सिलसिला, वैज्ञानिक चिंताजनक मान रहे हैं। गत वर्ष भी गोमुख का ग्लेशियर पिघलने की वजह से झील बन गई थी। अब एनआईएच के वैज्ञानिकों की टीम हिमालय खासतौर से गोमुख के ग्लेशियरों की गहराई से पड़ताल करने में जुटे हुए हैं।
 

विज्ञापन
Scientist revealing about rain and snowfall and change in himalaya
earth

हिमालय का पर्यावरणीय संतुलन गड़बड़ाने का असर दूर तक जाएगा। एक ओर जहां इसका असर वन्य जीवों पर पड़ेगा तो दूसरी ओर पानी की कमी, नदियों का सूखापन भी बढ़ जाएगा। वैज्ञानिक पहले ही अगले 50 वर्षों में पहाड़ों का तापमान दो से चार डिग्री बढ़ने का अनुमान जता चुके हैं।

 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed