हरिद्वार में गुरुकुल और ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज बुधवार को अखाड़ा बन गए। डीडीओ कोड बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलनरत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने अपना आंदोलन और तेज कर दिया। दो श्रेणी के कर्मचारियों ने आयुर्वेदिक कॉलेजों के परिसरों में तालाबंदी कर दी। इतना ही नहीं कर्मचारियों ने परिसर में कुर्सियों तक उठाकर फेंक डाली।
कर्मचारियों की तालाबंदी के कारण दोनों अस्पतालों में ओपीडी नहीं हो पाई और मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। कर्मचारियों के आंदोलन का डॉक्टरों ने भी समर्थन किया। कर्मचारी 12 दिसंबर को गुरुकुल और ऋषिकुल में पूर्णतया तालाबंदी कर समस्त स्टाफ विश्वविद्यालय के लिए कूच करेगा। बुधवार को संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले ऋषिकुल और गुरुकुल आयुर्वेद परिसर के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एकत्रित हुए।
उन्होंने पहले गुरुकुल परिसर में ओपीडी, अस्पताल और कक्षाओं में तालाबंदी की। इसके बाद कर्मचारी रैली निकालते हुए ऋषिकुल परिसर पहुंचे। ऋषिकुल परिसर में भी ओपीडी और पैथोलॉजी में तालाबंदी की। तालाबंदी करने के दौरान कर्मचारियों ने अस्पताल की कुर्सियां फेंक दी। इसके बाद उन्होंने कक्षाओं में पहुंचकर शिक्षण कार्य बंद कराया और कक्षाओं में भी तालाबंदी कर दी।
समिति के संयोजक सचिव शिवनारायण सिंह और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री दिनेश लखेड़ा ने कहा कि शासन उनकी एक सूत्री मांग को मानने तो तैयार नहीं है। डीडीओ कोड बहाली को लेकर कर्मचारी आंदोलनरत हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन चुप्पी साधे है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खेमानंद भट्ट ने कहा कि जब तक उनका डीडीओ कोड आवंटित नहीं किया जाएगा तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। समीर पांडेय ने कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय से विश्वविद्यालय से आश्वासन ही मिल रहें, कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने बताया कि दोनों कॉलेजों में पूर्ण तालाबंदी कर कर्मचारियों एवं शिक्षक विश्वविद्यालय के लिए कूच करेंगे।