प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अप्रैल 2017 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में एनएच-44 पर एशिया की करीब 10 किलोमीटर सबसे लंबी सड़क सुरंग देश को समर्पित की है। एशिया की सबसे बड़ी सुरंग की ये रोचक बातें आप नहीं जानते होंगे।
J&K में बनी एशिया की सबसे बड़ी सुरंग की ये रोचक बातें नहीं जानते होंगे आप
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इस सुरंग को रुड़की स्थित सीआईएमएफआर के वैज्ञानिकों ने डिजाइन किया है। सुरंग बनने के पांच साल तक वैज्ञानिकों ने कड़ी मेहनत से इसमें आने वाली हर समस्या का तकनीकी समाधान ढूंढा और उसे अजमाया। वैज्ञानिकों के इसी हुनर के चलते आज देश को ऐशिया की सबसे बड़ी सुरंग के निर्माण का गौरव प्राप्त हो सका है।
सीबीआरआई रुड़की के कैंपस स्थित सीआईएमएफआर (सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च) के प्रधान वैज्ञानिक डा. रमाधर द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि टनल बनाने का काम कार्यदायी संस्था आईएल एंडएफएस ने किया है। कंपनी की ओर से उन्हें साल 2012 में काम सौंपा गया था। जिसके तहत वैज्ञानिकों ने पहले कंपनी की ओर से उपलब्ध कराए गए एक डिजाइन को जांचा, लेकिन इसमें कई खामियां थी। जिसके बाद वैज्ञानिकों ने कमियों को दूर करते हुए टनल का डिजाइन तैयार किया।
इसके बाद संस्थान की अपनी तकनीकी के जरिए वैज्ञानिकों ने टनल के निर्माण का काम शुरू कराया और पांच साल की कड़ी मेहनत के बाद इसका निर्माण पूरा करने में सफलता हासिल की। इन पांच सालों में वैज्ञानिक लगातार जम्मू-कश्मीर के दौर पर रहे। शुरू में संस्थान को यह काम 50 लाख में दिया गया था, जो कि बाद में बढ़कर 75 लाख तक पहुंच गया। सुरंग बनाने में वैज्ञानिक डा. रमाधर द्विवेदी, डा. रजनीश गोयल, डा. जगदीश महनोत, अनिल स्वरूप एवं डा. हर्ष वर्मा ने काम किया है।
डा. द्विवेदी ने बताया कि सुरंग स्थायित्व से सबंधित मानकों के अनुसार यह सुरंग विश्व स्तर के सभी मानकों पर खरी उतरती है। इसमें स्थापित सभी सुरक्षा के इंतजाम अत्याधुनिक है। इस सुरंग के निर्माण से राजमार्ग का 41 किलोमीटर का दो घंटे रास्ता अब 9.2 किमी. लंबा रह गया है। इसमें अधिकतम गति सीमा 50 किमी. प्रति घंटा के हिसाब से इसे 11 मिनट में तय किया जा सकता है। इससे प्रति दिन करीब 27 लाख का ईंधन बचेगा। साथ ही ट्रैफिक जाम से भी निजात मिलेगी।