पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों पर भारी पड़ रही है। ठंड की वजह से धमनियों और नसों के सिकुड़ने से ब्रेन अटैक (सीवीए) पड़ रहा है। न्यूरो के रोगियों के लिए सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है।
बारिश-बर्फबारी से नसों में जम रहा खून, ऐसे रखें अपना ख्याल
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत न्यूरो रोगियों के लिए अलग से कोई कार्यक्रम शुरू नहीं किया गया है। दून मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी मेडिकल कालेज समेत अन्य सरकारी अस्पतालों के इंटेंसिव केयर यूनिट के बेड फुल हो गए हैं। बर्फबारी ने ब्रेन अटैक की समस्या को पहाड़ जैसा बना दिया गया है।
ब्रेन अटैक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के रोगियों में अधिक हो रहा है। ठंड के अचानक बढ़ने और रोगियों के शरीर में पानी की कमी होने की वजह से खून गाढ़ा हो रहा है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जा रहा है, जिसकी वजह खून का थक्का धमनियों और नसों में जम जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में न्यूरो चिकित्सकों की कमी है। हालत यह है कि दून मेडिकल कालेज और हल्द्वानी में सिर्फ एक-एक न्यूरो सर्जन है।
दून मेडिकल कालेज के न्यूरो सर्जन डा. डीपी तिवारी का कहना है कि ब्रेन अटैक के लगभग आधा दर्जन रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। इंटेंसिव केयर यूनिट के सारे बेड फुल हो गए हैं। हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज के रोगी ब्रेन अटैक का अधिक शिकार हो रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राष्ट्रीय कार्यक्रम निदेशक डा. आरएस असवाल का कहना है कि अलग से न्यूरो के लिए कोई कार्यक्रम नहीं है। ऐसे मरीजों की देखरेख के लिए डिस्ट्रिक अर्ली इंटरवेंशन सेंटर खोले गए हैं, वहां हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज के रोगियों का मैनेजमेंट होता है।