मेजर विभूति ढौंडियाल को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। वे दो बार असफल हुए, लेकिन फिर मंजिल तक पहुंच कर ही दम लिया। मेजर बनने के बाद उनका जोश और जुनून दोगुना हो गया था।
शहीद मेजर विभूति को बचपन से था सेना में जाने का जुनून, यहां से मिली थी प्रेरणा
शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल के दोस्तों ने उनके जुनून की कहानी बयां की। दोस्त मयंक ने बताया कि वह दोनों बचपन से ही साथ पढ़े। वर्ष 2000 में सेंट जोजेफ्स एकेडमी से 10वीं और 2002 में पाइन हॉल स्कूल से 12वीं पास की। इसके बाद डीएवी से बीएससी की पढ़ाई पूरी की।
इससे पहले कक्षा सात से ही विभूति ने सेना में जाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। सातवीं कक्षा में थे तो राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज(आरआईएमसी) में भर्ती की परीक्षा दी लेकिन चयन नहीं हुआ।
12वीं में एनडीए की परीक्षा दी, लेकिन चयन नहीं हुआ। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उनका चयन हो गया और वह ओटीए चेन्नई में प्रशिक्षण हासिल करने गए। यहां से वर्ष 2012 में पासआउट होकर सेना में कमीशन प्राप्त किया।
शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल के दो मामा फौज में हैं। वह हमेशा विभूति के लिए प्रेरणा बने। उनके एक जीजा भी सेना में हैं जो कि वर्तमान में कर्नल पद पर हैं और बिकानेर में तैनात हैं।