केंद्र सरकार की खुले में शौच से मुक्त करने की योजना उत्तराखंड के इन गांवों में अंधविश्वास के चलते थमती नजर आ रही है। उत्तरकाशी जिले के आठ गांवों में देवता का फरमान बताकर अपने घरों में शौचालय बनवाने से इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं क्षेत्र के कई परिवारों ने अपने पक्के शौचालय ध्वस्त कर खुले में शौच जाने का निर्णय लिया।
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नागराजा से शौचालय बनाने की अनुमति मांगते अधिकारी
- फोटो : अमरउजाला
आज बुधवार को भारत सरकार की योजना संचालित करने वाले एजेंसी स्वजल ने क्यारी दशगी में पंचायत बुलाई। नागराजा देवता को अवतरित करवाकर उन्हें कुछ शर्तों के साथ शौचालय बनवाने के लिए मनाने की कोशिश तो की किंतु गांव के लोग अभी भी पशोपेश की स्थिति में नजर आ रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत इस वर्ष स्वजल ने उत्तरकाशी जिले को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए शत प्रतिशत शौचालय निर्माण का लक्ष्य रखा है। लेकिन स्थानीय लोग अंधविश्वास के चलते शौचालय बनवाने से डर रहे हैं।
पहले चिन्यालीसौड़ के क्यारी दशगी, बनोट पल्ला, तराकोट, रमोली, बदाल्डा, सूरी, मथाली एवं जिब्या में शौचालय बनाने के अभियान शुरू करने गए स्वजल कर्मियों को ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि शौचालय अपवित्रता का प्रतीक है और इसको बनाने से ईष्ट देवता नाराज होते हैं। अंधविश्वास तथा देवता के फरमान की कुछ लोगों द्वारा मनमानी व्याख्या से क्षेत्र में अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई।
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शौचालय से भी छात्र-छात्राओं को राहत नहीं
- फोटो : अमर उजाला
इसीलिए बुधवार को क्षेत्र में आहूत पंचायत में स्वजल के मैनेजर वित्त रणवीर सिंह रावत, डा. लोकेंद्र चौहान, जिला मुख्यालय से ट्रेनी आईएएस नीतिका खण्डेलवाल, सीडीओ आनंद सिंह सहित चिन्यालीसौड़ ब्लाक व तहसील के अधिकारी सहित करीब 200 ग्रामीणों की पंचायत हुई।