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इस बाबा के चमत्कार ने हार्वर्ड के प्रोफेसर रिचर्ड को बना दिया रामदास, अद्भुत और अनोखी है इनकी कहानी

Sun, 17 Jun 2018 09:17 AM IST
गिरीश रंजन तिवारी/अमर उजााल, नैनीताल
गिरीश रंजन तिवारी/अमर उजााल, नैनीताल Updated Sun, 17 Jun 2018 09:17 AM IST
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 Neem karoli baba miracle on Harvard University professor become social activist
neem karoli baba

बाबा नीब करौली महाराज के भक्त सारी दुनिया में फैले हैं। निर्विवाद तथ्य है कि उनमें चमत्कारिक और आध्यात्मिक शक्तियां थीं। अमेरिका में रहकर सामाजिक सेवा कर रहे हार्वर्ड के पूर्व प्रोफेसर 87 वर्षीय रामदास जैसे हजारों लोग इसके जीवंत प्रमाण हैं। कभी घातक नशे के आदी रहे रिचर्ड अल्पर्ट की नशे की आदत छुड़वाकर बाबा ने उन्हें समाज सेवा की ऐसी लत लगाई कि वे आजीवन इसी में डूबकर रह गए। रिचर्ड को रामदास नाम बाबा ने ही दिया था। रामदास ने स्वयं तमाम लेखों और साक्षात्कारों में बाबा से जुड़े अनुभवों का उल्लेख किया है।

 Neem karoli baba miracle on Harvard University professor become social activist
neem karoli baba

1931 में जन्मे रिचर्ड 1967 में पहली बार भारत आए थे। तब वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय इंग्लैंड में साइकोलॉजी के सहायक प्रोफेसर थे और मनुष्य को दिग्भ्रमित कर देने वाले रसायनों व घातक नशे खासकर एलएसडी और सिलोसिबिन के प्रभावों का अध्ययन कर रहे थे। अध्ययन के लिए वे स्वयं भी एलएसडी का सेवन करते थे। रिचर्ड में आध्यात्म के प्रति भी रुझान था। वे नशे और आध्यात्म के बीच सामंजस्य की तलाश में थे।

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इसी अध्ययन के लिए वे भारत आए और कुछ समय बाद उनकी बाबा से मुलाकात हुई। रामदास ने वर्णन किया है कि वे बाबा से इस बारे में चाहकर भी बात नहीं पा रहे थे कि एक दिन बाबा ने खुद ही उनके दिल की बात जान ली। बाबा ने कहा कि तुम कोई सवाल करना चाह रहे हो पर रिचर्ड ने तब मना कर दिया। अगले दिन बाबा ने फिर खुद ही सवाल कर दिया कि वह दवा कहां है? रिचर्ड इस पर चौंक गए कि कौन सी दवा। फिर बाबा के कहने पर वे एलएसडी की गोलियां ले कर आए। रिचर्ड के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति के लिए इसकी एक गोली भी बहुत ज्यादा होती थी लेकिन बाबा ने शीशी में रखी तीन गोलियां एक ही बार में गटक लीं और उन पर इसका कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा।
 

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अमेरिका से लौट कर चार साल बाद रिचर्ड पुन: आश्रम में आए। तब उन्हें संदेह था कि बाबा ने गोलियां खाई भी थीं या यूं ही फेंक दी थीं। बाबा ने रिचर्ड के सामने फिर एलएसडी की गोली मांगी। रिचर्ड ने इस बार उन्हें चार गोलियां दीं जिन्हें बाबा ने उन्हें दिखाते हुए जीभ पर रखकर एक-एक करके पानी के साथ गटक लिया। इनका भी बाबा पर कोई असर नहीं हुआ। इस उदाहरण से दरअसल बाबा ने रिचर्ड को यह संदेश दिया कि इस नशे में कुछ नहीं रखा है, नशा करना हो तो आध्यात्म का या समाज सेवा का करो।

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इससे बड़ा कोई नशा नहीं है। बाबा के इस संदेश ने रिचर्ड के जीवन की धारा बदल दी। दीक्षा पाने के बाद बाबा ने रिचर्ड को रामदास का नाम दिया। रामदास ने हनुमान फाउंडेशन और सेवा फाउंडेशन नाम की संस्थाओं के माध्यम से भारत व नेपाल में अंधता निवारण, ग्वाटेमाला के गरीब किसानों की मदद करना, दक्षिण अमेरिकी भारतीयों के स्वास्थ्य की बेहतरी सहित आध्यात्मिक शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

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