पुलवामा मुठभेड़ में शहीद हुए 18 कुमाऊं के सिपाही राहुल रैंसवाल पिछले साल 7 नवंबर को घर से यह कहते हुए ड्यूटी के लिए निकले थे कि वह जल्द ही घर लौटेंगे। उन्हें 9 फरवरी को मेरठ में रहने वाले अपने साले के ब्याह के लिए आना था। पत्नी प्रीति अपनी इकलौती संतान को लेकर भाई की शहनाई बजने की खुशी में पहले से ही मेरठ में तैयारी में जुटी थीं लेकिन राहुल की शहादत की खबर ने सारी खुशियों को मातम में बदल दिया है।
2 of 6
शहीद राहुल रैंसवाल
- फोटो : अमर उजाला
राहुल की शहादत ने साले की शादी में आने के वादे को तो तोड़ा ही, इस हंसते-खेलते परिवार के सपनों को भी तोड़ डाला। पति के देश के लिए प्राण न्योछावर करने की भनक लगते ही पत्नी मेरठ से चंपावत को रवाना हो गईं हैं। राहुल के बड़े भाई राजेश रैंसवाल का परिवार भी उनके साथ लखनऊ में रहता है और वह भी घर के लिए रवाना हो गए हैं।
3 of 6
शहीद राहुल रैंसवाल
- फोटो : अमर उजाला
2012 में फौज में भर्ती हुए राहुल की पहली तैनाती अरुणाचल प्रदेश में हुई। उनका पूरा परिवार देश सेवा के लिए समर्पित रहा है। उनकी तीन पीढ़ियों ने देश की सेवा की है। शहीद राहुल के पिता वीरेंद्र सिंह रैंसवाल असम रायफल्स में नायक थे।
4 of 6
शहीद राहुल रैंसवाल
- फोटो : अमर उजाला
राहुल के दादा स्व. शिवराज सिंह रैंसवाल ने भी 5 कुमाऊं में रहते हुए देश सेवा की थी। राहुल के कई युवा साथियों की पिछले नवंबर में ही उनसे मुलाकात हुई थी। सभासद मोहन भट्ट, पूर्व सभासद नरेश जोशी, सुभाष तड़ागी, कपिल जोशी सहित पड़ोस के तमाम लोग उस मुलाकात को याद कर कहते हैं कि हंसमुख राहुल बेहद जिंदादिल इंसान थे।
5 of 6
शहीद राहुल रैंसवाल
- फोटो : अमर उजाला
शालीनता के साथ पड़ोसियों और अन्य लोगों से मिलते-जुलते थे। उनके सुख-दुख में हिस्सा लेते थे। बेहद सरल स्वभाव के शहीद के पिता वीरेंद्र सिंह रैंसवाल को बेटे की शहदात पर फक्र हैं लेकिन पुत्र को खोने का गम उनके मायूस चेहरे पर साफ झलक रहा था।