जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा में गुरुवार को शहीद हुए मानवेंद्र सिंह ने उसी रात अपने परिवार से जो बाते की थी पढ़कर आप भी भावुक हो जाएंगे।
मानवेंद्र ने मुठभेड़ पर जाने से पहले बुधवार रात को करीब 8.30 बजे अपने पिता नरेंद्र सिंह रावत, मां कमला देवी और मायके गए पत्नी विनिता सहित दोनों बच्चों से बातचीत की। उनकी कुशलक्षेम पूछने के साथ ही अपने बारे में बताया। कहा, कि इन दिनों यहां काफी तनाव है। सीमा पर से लगातार फायरिंग हो रही है, जिससे हर समय खतरा बना हुआ है।
इसके बाद रात को 11.30 बजे मानवेंद्र आतंकी मुठभेड़ में बुरी तरह जख्मी हो गए। उन्हें सेना के अस्पताल लाया गया। जहां से उन्होंने अपनी पत्नी और माता-पिता से आखिरी बार बात करते हुए स्थिति से अवगत कराया। मानवेंद्र की आवाज सुनते ही माता पिता की आंखों में सैलाब आ गया। इसके बाद देर रात 3.30 बजे वे शहीद हो गए।
शुक्रवार को प्रात: 9.30 सेना के हेलीकॉप्टर से शहीद का शव जौलीग्रांट पहुंचने की उम्मीद है। जहां से गौचर लाने के बाद गांव पहुंचाया जाएगा। बांदीपुरा में तैनात सूबेदार मेजर नरेंद्र सिंह ने बताया कि रात 10.30 से मुठभेड़ शुरू हो गई थी। दोनों तरफ से फायरिंग हो रही थी। इस दौरान हमारी तरफ से जवानों से दो आतंकियों को ढेर कर दिया था। तभी एक के बाद एक दो गोलियां मानवेंद्र को जा लगी, जिससे वह बुरी तरह से लहुलहुहान हो गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
यहां लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसके बाद सेना द्वारा बृहस्पतिवार तड़के मानवेंद्र के घर फोन कर उन्हें घटना से अवगत कराया गया,फौजी पिता नरेंद्र सिंह से प्रेरणा से लेते हुए मानवेंद्र सिंह इंटरामिडिएट के उपरांत वर्ष 2007 में सेना में भर्ती हुए। सात भाई-बहनों में तीसरे मानवेंद्र का विवाह 2011 में रामपुर-बडासू निवासी विनिता से हुआ। वर्ष 2013 में मानवेंद्र की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम जान्हवी रखा गया।