27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण के कारण गुरुओं की पूजा दोपहर तक ही हो सकेगी। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि शुक्रवार को दोपहर बाद चंद्र ग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाएगा।
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चंद्र ग्रहण 2018: शुक्रवार को दोपहर बाद इतने बजे से लग जाएगा सूतक, ये काम कतई न करें...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:52 PM IST
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खग्रास चंद्र ग्रहण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां
तीसरे पहर 2 बजकर 54 मिनट से चंद्र ग्रहण का सूतक लग जाएगा। सूतक से पहले ही सभी मंदिर बंद हो जाएंगे। हरकी पैड़ी पर सायंकालीन आरती भी नहीं होगी। गंगा आरती दिन में दो बजे होगी। चंद्र ग्रहण आषाढ़ पूर्णिमा की रात 11.54 बजे लगेगा और 28 जुलाई की सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर मुक्त होगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 55 मिनट रहेगी, जो अपने आप में कई दशकों के बाद हो रहा है।
Lunar eclipse
भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि दो बजे से पहले बंद हुए मंदिर 28 जुलाई की सुबह ही खुल पाएंगे। 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुओं की पूजा और अन्य आयोजन दोपहर दो बजे के बाद करना वर्जित है। सूतक में गुरु पूजा करने से गुरु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि सूतक काल में मूर्ति स्पर्श नहीं की जाती, इसलिए मंदिरों को बंद किया जाता हैं।
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lunar eclipse
गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण के समय अपनी गोद में पानी वाला नारियल लेकर बैठना चाहिए। इस नारियल को अगले दिन नदियों में प्रवाहित किया जाता है। डॉ. मिश्रपुरी ने बताया कि पूर्ण चंद्र ग्रहण उत्तरषाढा नक्षत्र के अंतिम चरण में प्रारंभ होगा और ग्रहण का मोक्ष श्रवण नक्षत्र में होगा।
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- फोटो : lunar
यह ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा, अत: सभी राज्यों को प्रभावित करेगा। मेष, वृष, कर्क, सिंह, कन्या, धनु, मकर और कुंभ रशि के लिए यह ग्रहण श्रेष्ठ नहीं है। मिथुन, तुला और वृश्चिक राशियों के लिए ग्रहण सुख प्रदान करने वाला है। नदियों और समुद्र के तटों पर रहने वाले लोगों पर ग्रहण का पूर्ण असर पड़ेगा।