29 अगस्त की सुबह उमा सिंह के परिजनों के लिए मनहूस साबित हुई। परिवार के सात सदस्य एक साथ काल के मुंह में समा गए।
टिहरी भूस्खलन: इसी माह परिवार में आने वाला था नन्हा मेहमान, लेकिन काल में समा गईं 7 जिंदगी
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इन दिनों उमा सिंह और उनकी पत्नी डबली देवी मवेशियों के साथ गांव से दूर महासरताल में अपनी छानी (गोशाल) में गए हुए हैं, जबकि परिवार के सदस्य गांव में ही थे। उमा सिंह के दो बेटे हुकम सिंह और राकेश मुंबई में होटल में नौकरी करते हैं, जिन्हें गांव के लोगों ने घटना के संबंध में सूचना दे दी है।
बड़ा बेटा मोर सिंह गांव में ही खेतीबाड़ी और मजदूरी करता है। भूस्खलन में मोर सिंह का परिवार दब गया। केवल उनकी 11 वर्षीय बेटी बबली ही सकुशल बच सकी। मोर सिंह की पत्नी हंस देई का इसी माह प्रसव होना था। हंस देई की ननद शकुंतला यह बताते हुए फफक कर रो पड़ी और कुछ नहीं बोल पाई। हंस देई का मायका भिलंगना ब्लॉक के आर्स गांव में है। उसके दो बच्चों में आशीष की तो हादसे में मौत हो गई, जबकि बबली किसी तरह सुरक्षित बच गई। घटना की ग्वाह बबली फिलहाल कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है। उसके समझ में नहीं रहा है कि उसके साथ यह क्या हो रहा है।
कोट गांव में पहले भी बरपी आपदा
भूकंप और भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील भिलंगना ब्लॉक के कोट गांव में दो बार पहले भी आपदा का कहर बरपा है। वर्ष 1991 में भूकंप से कोट गांव में एक मकान जमींदोज होने से एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत हो गई थी। वर्ष 2002 में भूस्खलन से इसी गांव में एक मकान क्षतिग्रस्त होने से एक ही परिवार के दो सदस्यों को जान गंवानी पड़ी थी।
हेलीकॉप्टर ने नहीं भरी उड़ान
कोट गांव में भूस्खलन होने से एक परिवार के सात सदस्यों की मौत की सूचना पाकर जिले के प्रभारी और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत और क्षेत्रीय विधायक शक्ति लाल शाह को देहरादून से घनसाली आना था। जिला प्रशासन ने घनसाली और बूढ़ाकेदार इंटर कॉलेज में मंत्री का हेलीकॉप्टर उतारने की तैयारी पूरी कर ली थी, लेकिन देहरादून में बारिश के चलते मंत्री का हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया। बाद में विधायक शाह देहरादून से कार से घनसाली के लिए रवाना हो गए हैं।