हरिद्वार में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बाद भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। सामाजिक दूरी के साथ ही नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रेलवे स्टेशन पर जांच करने के लिए लगाई गई प्राइवेट पैथोलॉजी लैब के सदस्य ही मास्क नहीं लगा रहे हैं। इसके साथ ही यहां पर कोई हेल्प डेस्क भी नजर नहीं आ रही है।
जांच के लिए बनाए गए केंद्रों पर सामाजिक दूरी के नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा है। कई रेलवे कर्मचारी और पुलिसकर्मी भी मास्क को सहीं ढंग से नहीं लगा रहे हैं।
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प्लेटफार्म पर बैठे यात्री भी मास्क को लेकर गंभीर नहीं है। वहीं भारत दर्शन करने के लिए आए विदेशी नागरिक कोरोना संक्रमण के प्रति सतर्क हैं। कोरोना का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रही है। बढ़ते संक्रमण के बाद भी लोग जागरूक नहीं दिख रहे हैं।
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नियमों को भी दरकिनार कर रहे हैं। शुक्रवार को रेलवे स्टेशन पर कोरोना के नियमों की यात्री जमकर धज्जियां उड़ाते हुए नजर आए। किसी के चेहरे पर मास्क नहीं था तो कोई सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रहा था।
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हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर बिना मास्क के लोग
- फोटो : अमर उजाला
इसके साथ ही कोविड की जांच के लिए बनाए गए कैंप में भी सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो रहा था। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो की एक बैंच पर ट्रेन का इंतजार कर रहे चार युवकों के बीच सामाजिक दूूरी कोई मायने नहीं रख रही थी। इसके साथ ही उनके चेहरे पर लगे मास्क ठोड़ी से नीचे थे।
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हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर बिना मास्क के लोग
- फोटो : अमर उजाला
रेलवे स्टेशन परिसर में लगाए गए कोविड जांच के कैंप में यात्री जांच कराने के लिए लाइन में लगे हुए थे। जो एक दूसरे से बिल्कुल सटकर खड़े हुए थे। इनके बीच कहीं तक भी सामाजिक दूरी नजर नहीं आ रही थी।
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हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर बिना मास्क के लोग
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, शाही स्नानों के लिए आईं शटल सेवा की बसों को वापस भेज दिया गया है। शटल सेवा में कुल 850 बसों को लगाया गया था, जिसमें से 250 बसें उत्तराखंड परिवहन निगम की थी। वहीं, 600 बसें स्थानीय टूर एंड ट्रेवर्ल्स एजेंसियों से हायर की गई थीं।
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हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर बिना मास्क के लोग
- फोटो : अमर उजाला
महाकुंभ में सोमवती और मेष संक्रांति शाही स्नान के लिए श्रद्धालुओं की सुविधाओं को देखते हुए शटल सेवा की बसें मेला क्षेत्र में चलाई गई थीं। इस बसों को अस्थायी पार्किंगों और रेलवे स्टेशनों से घाटों तक चलाया गया था। जिससे स्नान करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ज्यादा दूर तक पैदल न चलाना पड़ेे।