श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए मंदिर सज गए हैं। पंडित सुशांत राज के मुताबिक जन्माष्टमी पर राशियों के अनुसार कन्हैया का श्रृंगार व पूजा-अर्चना करने से घर में सुख समृद्धि आने के साथ ही कष्टों का विनाश भी होगा।
जन्माष्टमी 2019: राशि के अनुसार करें कान्हा का श्रृंगार और पूजन, इन बातों का भी जरूर रखें ध्यान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त की रात 11:46 बजे से शुरू होकर 25 अगस्त सुबह 4:17 बजे तक रहेगा। भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में रात्रि 12 बजे हुआ था। दोनों दिन रोहिणी नक्षत्र है। इसलिए दोनों ही दिन व्रत रखने से शुभ फल मिलेंगे।
पूजा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। श्रीकृष्ण को बांसुरी बहुत पंसद है। इसलिए उनके श्रृंगार में बांसुरी रखना न भूलें। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या शालिग्राम की विधि पूर्वक पूजा करें। इसके साथ ही जहां भी पूजा का मंडप सजाएं वहां बाल कृष्ण के स्वरूप को दुग्धपान कराती देवकी, विष्णु जी और लक्ष्मी जी की युगल मूर्ति, नंद जी व बलदेव समेत यशोदा जी की मूर्ति भी स्थापित करें।
राशि के अनुसार करें पूजन
मेष व वृश्चिक राशि वाले कृष्ण का श्रृंगार सिंदूरी वस्त्र से करें व गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
वृषभ व तुला राशि वाले सफेद वस्त्र से श्रृंगार करें व माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
मिथुन व कन्या राशि वाले हरे वस्त्र से श्रृंगार करें व मक्खन बड़े का भोग लगाएं।
कर्क राशि वाले गुलाबी मोतिया रंग या लहरिया वस्त्र से श्रृंगार करें व पंचामृत और काजू का भोग लगाएं।
सिंह राशि वाले मेहरून वस्त्र से श्रृंगार करें व रबड़ी का भोग लगाएं।