शहर के मंदिरों, आश्रमों और अन्य स्थलों पर कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारी पूरी हो चुकी हैं। गृहस्थ रविवार को जबकि वैष्णव सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र व वृषभ लग्न का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए भक्तजन पूरे दिन उपवास रखते हैं। सुबह और शाम पूजा-अर्चना करते हैं। रात्रि जागरण और श्रीकृष्ण के नाम पर भजन-कीर्तन करते हैं। लेकिन अगर आप 2 सितंबर को व्रत न रख पाएं तो 3 सितंबर को इस शुभ मुहूर्त में पूजन करें।
कृष्ण जन्माष्टमी 2018: कल न रख पाए व्रत तो आज इस शुभ मुहूर्त में करें कान्हा का पूजन
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ज्योतिषियों के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अद्भुत संयोग बन रहा है। इस बार वैसा ही संयोग बन रहा है जैसा द्वापर युग में उनके जन्म के समय बना था। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र हो, सूर्य सिंह राशि में हो तथा चंद्रमा वृष राशि में हो तब यह योग बनता है। रविवार को रात्रि 10:30 बजे से लेकर रात्रि 12:06 बजे तक वृष लग्न भी होगा।
जन्माष्टमी 2 सितंबर को है। 2 सितंबर की रात्रि को 8 बजकर 48 मिनट से अगले दिन शाम 7 बजकर 20 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। रोहिणी नक्षत्र रात्रि 8:49 बजे से सोमवार रात्रि 8:05 बजे तक रहेगा। 3 सितंबर को अष्टमी व रोहिणी नक्षत्र का संयोग शाम 7:20 बजे तक रहेगा इसके बाद अर्द्धरात्रि में नवमी तिथि मृगशिरा नक्षत्र व्याप्त होने से अष्टमी व्रत का विशेष माहात्म्य नहीं होगा। इसलिए 2 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी अर्द्धरात्रि अष्टमी रोहिणी नक्षत्र वृषभ लग्न चंद्रोदय काल में मनाना शुभ रहेगी। वहीं वैष्णव सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे।
जन्माष्टमी का मुहूर्त
अष्टमी तिथि प्रारंभ - 2 सितंबर को रात्रि 8:48 बजे से
अष्टमी तिथि समाप्त - 3 सितंबर को शाम 7:20 बजे तक
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ - 2 सितंबर को रात्रि 8:49 बजे से
रोहिणी नक्षत्र समाप्त - 3 सितंबर को रात्रि 8:05 बजे तक
निशीथ काल पूजन - 2 सितंबर को रात्रि 11:50 से 12:40 तक
वृषभ लग्न 2 सितंबर को रात्रि - 10:30 से 00:05 तक