केदारनाथ यात्रा में हेली कंपनियां पुराने दोयम दर्ज के हेलीकॉप्टरों का प्रयोग कर रही हैं। यह दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। पहले भी यात्राकाल में टेकऑफ व लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर में खराबी की घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन, शासन इस बारे में सुध नहीं ले रहा है। इस संबंध में बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा डॉटकॉम के संचालक एएनके श्रीनिवास ने दो वर्ष पूर्व हाईकोर्ट में इस संबंध में याचिका दायर की थी।
Kedarnath Helicopter Crash: मुनाफे की होड़ में हांफ रहे हेलीकॉप्टर, हादसे के बाद कल बंद रही हेली सेवा, आज शुरू
उन्होंने केदारघाटी में हेलीपैड निर्माण व डीजीसीए द्वारा नव निर्मित हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर की उड़ान की अनुमति को लेकर भी सवाल किया था। साथ ही हेलीपैड पर यात्री सुविधाएं न होने, बिना इंजन बंद किए हेलीकॉप्टर में फिलिंग करने, नए हेलीपैड को मानकों के विपरित अनुमति देने की बात कही है।
उन्होंने वैष्णु देवी यात्रा की तर्ज पर अधिकतम दस वर्ष लाइसेंस अवधि वाले हेलीकॉप्टर को उड़ान की अनुमति देने की मांग की है।
6 से 13 तक पहुंची हेली कंपनियों की संख्या
जून 2013 की आपदा के बाद से केदारनाथ यात्रा पैदल यात्रा को सुरक्षित व सुलभ बनाने के दावों के बीच प्रदेश सरकारों का ध्यान हेलीकॉप्टर सेवा पर अधिक रहा है। यही कारण है कि वर्ष 2014 में जहां केदारनाथ यात्रा में सिर्फ 6 हेली कंपनियों ने अपनी सेवा दी थी। वहीं, यह संख्या 2016 व 2017 में 13 तक जा पहुंची। लेकिन 2018 व 2019 में हेली कंपनियों की संख्या कम रही। वर्तमान में भी नौ हेली कंपनियां केदारनाथ यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन कर रही हैं।
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केदारनाथ यात्रा में हेलीकॉप्टरों की अत्यधिक उड़ान केदारघाटी और धाम के लिए सही नहीं हैं। यूकाडा के साथ सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए हेली सेवा को कम से कम करना चाहिए।
-चंडी प्रसाद भट्ट पर्यावरणविद् एवं गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित, गोपेश्वर/चमोली