2013 की केदारघाटी आपदा में समा गए 3187 श्रद्धालुओं का नामोंनिशां तक नहीं मिल पाया। पांच साल तक चले सर्च आपरेशन में अब तक 699 नरकंकाल मिल चुके है, जिनमें से 33 का ही डीएनए मिलान हो सका है। आपदा में अपनों को गंवाने वाले परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं। अधिकांश लोगों को बस इस बात का रंज जरूर है कि उन्हें अपनों का कांधा नसीब नहीं हो सका।
केदारनाथ आपदा के 6 साल : आज तक नहीं मिल पाया 3187 श्रद्धालुओं का नामोंनिशां
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केदारनाथ त्रासदी की मार से पूरा देश छटपटाया था। 16 जून 2013 की रात केदारनाथ, गौरीकुंड समेत कई स्थानों पर हजारों लोग मौजूद थे। आपदा के बाद मची अफरातफरी में इंसानी जिंदगियां तिनके की तरह बिखरती चली गई। भयावह हालात के चलते दो दिन तक फंसे लोगों को राहत तक नहीं पहुंच सकी। आईजी संजय गुंज्याल और एएसपी नवनीत भुल्लर की अगुवाई में दो टीमाें ने राहत बचाव शुरू किए। इसके बाद शुरू हुआ आपदा में मौत के मुंह में गए श्रद्धालुओं के शव मिलने का सिलसिला।
आपदा के बाद राहत बचाव में सरकार की तमाम ताकत नाकाफी साबित हुई। इस प्राकृतिक आपदा में देश भर के करीब 3886 श्रद्धालुओं की जान गई। इनमें से करीब 699 लोगों के नरकंकाल अगले पांच साल मिलते गए, क्योंकि श्रद्धालु केदारघाटी के दुर्गम इलाकों में फंसे थे, जहां तक राहत पहुंचना मुमकिन नहीं हुआ। आपदा के पास जैसे-जैसे पर्यटकों की दुर्गम इलाकों में चहल-कदमी बढ़ी तो श्रद्धालुओं के अवशेष मिलते गए। 2013 में 545 शव मिलने के बाद अगले पांच साल सर्च आपरेशन के दौरान नरकंकाल मिलने का सिलसिला चलता रहा।
आपदा में मुरादाबाद के एक परिवार ने अपने नौ सदस्यों को खोया था। यूपी पुलिस में उप निरीक्षक भुवन शर्मा के पिता, मां, ताऊ, ताई, भतीजी, ताऊ के समधी और उनकी पत्नी समेत नौ लोग केदारनाथ के दर्शन को आए थे। केदारघाटी की आपदा इन तमाम लोगों की जिंदगी निगल गई। इनमें से किसी एक का भी कोई निशान नहीं मिल पाया। पूरा परिवार इस त्रासदी को भूल नहीं पाया। अमर उजाला से बातचीत में अपनों को याद कर दरोगा भुवन चंद शर्मा की आंखों में आंसु छलक आए। ता उम्र इस बात का अफसोस जरूर रहेगा कि उन्हें अपनों के अंतिम दर्शन भी नहीं हो सके।
आपदा के दौरान सक्रिय रहे सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक राम सिंह मीणा ने बताया कि हैदराबाद की प्रयोगशाला में 908 डीएनएन सेंपल भेजे गए थे। इनमें 230 सैंपल उनके लोगों के थे, जिनके माता-पिता या बेटा गायब हुआ था। सरकार की तरफ से डीएनए सैंपल उपलब्ध कराने की व्यवस्था हर राज्य में की थी। उस समय डीएनए सैंपल में करीब 86 लाख रुपये का खर्च आया था। सिर्फ 33 नरकंकालों की पहचान डीएनए मिलान से हो सकी।