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छह बरस में बदल गई केदारपुरी की सूरत, अब दूर से नजर आता है बाबा केदार का आलौकिक स्वरूप, तस्वीरें

Tue, 18 Jun 2019 10:28 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरुणेश पठानिया , अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 18 Jun 2019 10:28 AM IST
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kedarnath disaster six year complete beautification of kedarnath after disaster
- फोटो : अमर उजाला

केदारनाथ आपदा के जख्म अब वक्त के साथ भरने लगे हैं। वर्ष 2013 की जिस आपदा ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। उसके जख्मों पर वहां हुए पुनर्निर्माण कार्यों ने काफी हद तक मरहम लगाने का काम किया है। केदारघाटी का नया स्वरूप इसका गवाह है। अब केदारपुरी बदले स्वरूप में आलौकिक नजर आ रही है। धाम को भव्य स्वरूप प्रदान करने वाले कामगार और कार्यदायी संस्थाओं का कहना है कि इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। बाबा में पीएम मोदी की आस्था ही है कि उन्होंने पुनर्निर्माण कार्यों की व्यक्तिगत मानीटरिंग की। तकरीबन 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। पूरी संभावना है कि वर्ष 2020 तक धाम का पुनर्निर्माण पूरा हो जाएगा। 

kedarnath disaster six year complete beautification of kedarnath after disaster

आपदा के उस भयानक मंजर के छह साल के बाद केदारनाथ धाम की पूरी तस्वीर बदल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद केदारघाटी के पुनर्निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी ली। बाबा केदार के दरबार में पहुंचने पर वहां आपदा के निशान न के बराबर हैं। आपदा के बाद का दर्दनाक मंजर देखने वाले अब धाम को देख स्तब्ध हुए बिना नहीं रह सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले कार्यकाल में केदारनाथ पुनर्निर्माण को शुरू करवाया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने 20 अक्टूबर 2017 को केदारनाथ में करोड़ों की लागत से पांच पुनर्निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया था। कदम कदम पर बेहतर सुविधाओं के साथ ही पैदल मार्ग के प्रारंभिक बिंदु से ही भोले बाबा के धाम का दीदार होने लगता है।

kedarnath disaster six year complete beautification of kedarnath after disaster

मंदिर के चबूतरे का क्षेत्रफल 1500 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 4125 वर्ग मीटर कर दिया गया है। आपदा में मंदाकिनी और सरस्वती नदियों के संगम स्थल से मंदिर परिसर तक 270 मीटर की दूरी पर इकट्ठा हो गए 12 फीट मलबे को खुदाई कर हटा दिया गया है। सरस्वती और मंदाकिनी के संगम से केदारनाथ मंदिर के बीच कोई भी दुकान नहीं है, जिससे मंदिर का दृश्य दूर से दिखाई देता है। सरस्वती नदी पर 470 मीटर और मंदाकिनी नदी पर 380 मीटर लंबाई में सुरक्षा दीवार बन गई है। गरुड़चट्टी से केदारनाथ धाम तक का साढे़ तीन किलोमीटर पैदल मार्ग बन चुका है। रामबाड़ा से केदारनाथ तक पूर्व में निर्मित पैदल मार्ग को लगभग तीन मीटर से बढ़ाकर 5.20 मीटर चौड़ा किया गया है। 
 

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- फोटो : अमर उजाला

मंदाकिनी के दाहिने तट से 200 मीटर ऊंचाई पर योग ध्यान गुफा का निर्माण हो चुका है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी एक रात रुककर साधना कर चुके हैं। गुफा का निर्माण पहाड़ी शैली से किया है। ये गुफा पांच मीटर लंबी और तीन मीटर चौड़ी है। जहां पर साधना के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। गुफा की छत पर पहाड़ी पत्थर लगाए गए हैं और उसका आंगन भी इन्हीं से बनाया गया है। साधना के दौरान गुफा का दरवाजा पूरी तरह बंद रहता है और खिड़की से ही उसे भोजन व अन्य जरूरी सामान भिजवाया जाता है। आपात समय के लिए गुफा में लोकल फोन की सुविधा भी है।
 

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केदारनाथ में दिव्य शिला के पीछे बनने वाली आदि शंकराचार्य की समाधि भूमिगत गुफा में होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने 19 मई को धाम पहुंच कर समाधि निर्माण के संबंध में दिशा निर्देश दिये हैं। इसके लिए 100 मीटर लंबी गुफा तैयार की जाएगी। सितंबर 2020 तक इसका कार्य पूरा करने की कोशिश की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ मंदिर परिसर, गोल चबूतरा, मंदिर परिसर व मंदिर मार्ग का विस्तार करने के साथ संगम पर गोल चबूतरा का गोल निर्माण किया जा चुका है। मंदिर परिसर के मुख्य आकर्षण में से एक अराइवल प्लाजा है, जिसका क्षेत्रफल 64 वर्गमीटर है। इसके अलावा टेंपल प्लाजा और सेंट्रल प्लाजा भी यहां आकार ले चुके हैं। 
 

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