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केदारनाथ: भगवान शिव के इस धाम में भक्तों की अटूट आस्था के पीछे है यह चमत्कार

Sun, 29 Apr 2018 05:07 AM IST
केदारनाथ से विनय बहुगुणा
केदारनाथ से विनय बहुगुणा Updated Sun, 29 Apr 2018 05:07 AM IST
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kedarnath dham miracle story
kedarnath dham

भगवान आशुतोष के बारह ज्योर्तिलिंगों में से ग्यारहवें केदारनाथ में भगवान शिव का स्वयंभू लिंग स्थापित है। जहां यात्रा काल में बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति की विशेष पूजा अर्चना होती है। और मुख्य पुजारी द्वारा उन्हें प्रतिदिन बाल भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केदारनाथ मंदिर आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया है।



 

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kedarnath dham - फोटो : amar ujala
यह निर्माण कत्युरी शैली में होना बताया गया है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध में पांडवों द्वारा गोत्र हत्या व गुरू हत्या के पाप से मुक्त होने के लिए हिमालय भ्रमण किया गया था। उन्हें महर्षि नारद ने हिमालय में पहुंचकर भगवान शंकर के दर्शन करने को कहा था। तब पांच पांडव द्रोपती के साथ केदारघाटी के गांवों से होते हुए केदारनाथ धाम पहुंचे थे। लेकिन भगवान शिव शंकर उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे।

 
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3 may pm modi visit in kedarnath - फोटो : amarujala
ऐसे में भगवान उनसे दूर-दूर भागते रहे। लेकिन पांडव भी भगवान का पीछा करते रहे। इस दौरान केदार क्षेत्र में भगवान शिव ने पांडव से बचने के लिए भैंसे का रूप धारण लिया। और वहां विचरण कर रहे अन्य भैंसों के समूह में जा मिले। लेकिन पांडु पुत्र भीम ने उन्हे पहचान लिया, और भगवान को पकडने लगा। इसके बाद भगवान शिव ने प्रसन्न होकर पांडवों को साक्षात दर्शन दिए। और उन्हें गोत्र व गुरू हत्या के पाप से मुक्त कर दिया।

 
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बाबा केदारनाथ - फोटो : AmarUjala
इसी बीच भगवान शंकर भूमि में धंसने लगे। और भीम उनका पृष्ठ भाग ही पकड़ पाया। इस लिए केदारनाथ में भगवान शिव के स्वयंभू लिंग के पृष्ठ भाग की पूजा की जाती है। जबकि अग्र भाग की पूजा नेपाल के पशुपातिनाथ में की जाती है।

 
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kedarnath temple
नाभि की पूजा द्वितीय केदार मद्महेश्वर, बाहु की पूजा तृतीय केदार तुंगनाथ, नेत्र की पूजा चतुर्थ केदार रुद्रनाथ तथा जटाओं की पूजा पंचकेदार कल्पेश्वर धाम में होती है। केदारनाथ में गर्भ गृह के बाहर सभा मंडप में पांच पांडवों के साथ द्रोपती की मूर्ति भी विराजमान है। केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग के अनुसार भगवान आशुतोष के स्मरण और पूजा से भक्त सभी कष्टों से दूर हो जाते हैं। और वे अपने जीवन में किसी भी प्रकार के पाप से भी मुक्त हो जाते हैं।
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